ताज़ा खबर
 

गुजरात सरकार ने नहीं दिया शहीद के परिवार को मुआवजा, 8 साल से चिट्ठियां लेकर भटक रहे मां-बाप

शहीद के पिता ने कहा रुषिकेश स्वभाव से काफी भावुक था, जब गुजरात में भूकंप आया था तब उसने अपने स्कूल के पुनर्निर्माण के लिए लोगों से पैसे मांगकर चंदा इकट्ठा किया था।

Author Published on: June 7, 2017 7:02 PM
शहीद के माता-पिता अपने बेटे के सम्मान में आठ साल से लड़ रहे हैं। (File Photo)

गुजरात के शहीद मेजर रुषिकेश रमानी का मंगलवार को पुण्यतिथि था और उसकी मां की आंख आंसूओं से उस वक्त भर गई जब उनके लाल का चेहरा उनकी आंखों के सामने आ गया। रुषिकेश अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। वो आठ साल पहले जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गया था। तब उसकी उम्र 25 साल थी। शहीद के माता-पिता अपने बेटे के सम्मान में आठ साल से लड़ रहे हैं। लेकिन उनके परिवार को सरकार से अबतक कोई मदद नहीं मिली है।

एक ओर सरकार सर्जिकल स्ट्राइक पर खूब वाहवाही बटोर रही है, लेकिन शहीद हुए जवानों के परिजनों को कोई आर्थिक मदद नहीं दिया नहीं दिया जा रहा है। शहीद के पिता वल्लभ भाई रमानी ने दावा किया है कि सरकारी कागजों में उन्हें सरकार की ओर से 16 एकड़ जमीन आवंटित की गई थी, लेकिन वो सिर्फ फाइलों में दर्ज है। हकीकत में उन्हें कुछ भी नहीं दिया गया है। जबकि वो उनका अधिकार है। उन्होंने बताया कि वे पिछले आठ सालों से राजस्व विभाग और कई मंत्रियों को चिट्ठी लिख चुके हैं, लेकिन उन्हें आश्वासन के अलावा कुछ नहीं दिया गया है।

शहीद के पिता ने कहा जिस तरह की सरकार शहीदों के परिजनों को बेसहारा करके छोड़ देती है, इससे सेनाओं में उदासीनता की भावना पैदा होती है। उन्होंने कहा, ‘मैं एक शिक्षित पिता हूं, जब मुझे दफ्तरों के चक्कर काटने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है तो ऐसे में उन ग्रामीण परिजनों का क्या होगा? वो भला कहां-कहां तक सिस्टम के साथ लड़ेंगे।’

रमानी ने बताया कि उन्हें फक्र है कि उनके बेटे ने उनका मान बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि उनका बेटा देश के लिए फ्री में सेवा करना चाहता था। उसकी हमेशा से ये चाहत थी कि वो देश की सेवा के लिए अपनी न्योछावर कर दे और उसने वैसा ही किया। रमानी ने बताया कि रुषिकेश सेना में जाने के लिए अपने चाचा से प्रेरित हुआ था। जो भारतीय वायु सेना में थे। जब रुषिकेश कक्षा 6 में था तो उसके चाचा ने आर्मी स्कूल में दाखिला करा दिया था। हालांकि, हमें बाद में थोड़ी चिंता जरुर हुई, क्योंकि वो हमारा एकमात्र बेटा था। लेकिन उसकी ख्वाहिश थी कि वो सेना में भर्ती हो तो हमने उसपर कोई जोर नहीं दिया।

शहीद के पिता ने कहा रुषिकेश स्वभाव से काफी भावुक था, जब गुजरात में भूकंप आया था तब उसने अपने स्कूल के पुनर्निर्माण के लिए लोगों से पैसे मांगकर चंदा इकट्ठा किया था। उन्होंने बताया कि आज हमें अपने बेटे के सम्मान के लिए दर-दर की ठोकरे खाना पड़ रहा है। हम कई बार राजस्व विभाग और गुजरात सरकार को चिट्ठी लिख चुके हैं। उन्होंने कहा कि बात सिर्फ 16 एकड़ जमीन की नहीं है, बल्कि बात एक शहीद के सम्मान की है।

शहीद के पिता ने कहा कि उन्होंने गुजरात सरकार द्वारा मिले सेना पदक पुरस्कार में 3000 रुपये के चेक को लौटा दिया। क्योंकि यह राशि उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाता है। उन्होंने कहा कि हरियाणा जैसे राज्य शहीदों को 5 लाख रुपये का नकद पुरस्कार दे रहे हैं। जबकि यहां मात्र 3 हजार रुपये दिया जा रहा है। ये बहुत शर्म की बात है।

देखिए वीडियो - सुकमा नक्सली हमला: गौतम गंभीर शहीद हुए 25 CRPF जवानों के बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाएंगे

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 गुजरात: 48 हजार विस्तारकों को आया बीजेपी की ओर से फोन, लेकिन स्क्रीन पर नाम अरविंद केजरीवाल का
2 गुजरात में गौहत्‍या करने वालों को होगी उम्रैकद की सजा, रात में गायें ले जाने पर टोटल बैन
3 गुजरात: क्रिकेट टूर्नामेंट में विजेता टीम को ट्राफी की जगह मिली गाय