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गुजरात चुनाव: सीएम रुपाणी को सबसे अमीर कैंडिडेट की चुनौती, कहा-मेरे पास पैसा, गरीबों की मदद करूंगा

राजकोट पश्चिमी सीट पिछले चार दशक से बीजेपी का गढ़ माना जाता रहा है मगर इस बार के चुनाव में वहां बीजेपी के लिए मुकाबला कांटे का लग रहा है

Author Updated: November 27, 2017 5:47 PM
राजकोट पश्चिमी सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार इंद्रनील राजगुरू।

गुजरात विधान सभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे चुनावी मुकाबला रोचक होता जा रहा है। राज्य के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी के खिलाफ राजकोट पश्चिमी सीट से कांग्रेस ने सबसे अमीर उम्मीदवार इंद्रनील राजगुरू को मैदान में उतारा है। राजगुरू ने अपने चुनावी हलफनामे में कुल 141 करोड़ रुपये की संपत्ति का खुलासा किया है जबकि सीएम रुपाणी ने 7.4 करोड़ रुपये की संपत्ति का विवरण सौंपा है। मुख्यमंत्री को चुनौती देते हुए राजगुरू ने कहा है कि उनके पास पैसा है। लिहाजा, वो गरीबों की मदद करेंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि सीएम रुपाणी की सिर्फ एक खासियत है कि पीएम नरेंद्र मोदी ने उन्हें चुना है, जो 13 सालों तक गुजरात पर शासन कर चुके हैं। बता दें कि इंद्रनील राजगुरू राजकोट पूर्वी सीट से विधायक हैं मगर उस सीट को छोड़कर राजकोट पश्चिमी सीट पर मुख्यमंत्री के खिलाफ ताल ठोकने उतरे हैं। राजगुरू को स्थानीय लोग धनकुबेर नाम से भी पुकारते हैं।

राजकोट पश्चिमी सीट पिछले चार दशक से बीजेपी का गढ़ माना जाता रहा है मगर इस बार के चुनाव में वहां बीजेपी के लिए मुकाबला कांटे का लग रहा है। यह सौराष्ट्र क्षेत्र का सबसे बड़ा विधान सभा क्षेत्र है, जहां करीब 3.15 लाख मतदाता हैं। इनमें से करीब एक चौथाई यानी 75, 000 के करीब पाटीदार वोटर हैं जो पहले के मुकाबले इस बार कांग्रेस को समर्थन देने के मूड में हैं। पाटीदार समाज लंबे समय से शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण देने की मांग करता रहा है। पाटीदारों को बीजेपी का परंपरागत मतदाता समझा जाता था लेकिन इस बार के चुनाव में यह परंपरागत वोट बैंक बीजेपी से छिटक चुका है।

इसके अलावा बीजेपी के लिए मुश्किल की बात यह भी है कि इस इलाके में बहुत कम विकास हुआ है, जबकि इस क्षेत्र से केशुभाई पटेल, नरेंद्र मोदी और विजय रुपाणी समेत तीन-तीन लोग राज्य के भाजपाई मुख्यमंत्री हुए हैं। नरेंद्र मोदी ने साल 2001 में अपना पहला चुनाव इसी सीट से जीता था। स्थानीय लोगों की शिकायत है कि तीन-तीम सीएम देने के बावजूद इलाके की सूरत नहीं बदली। स्थानीय लोग राजकोट और वड़ोदरा के विकास की तुलना करते हैं और बीजेपी सरकारों पर उपेक्षा का भी आरोप मढ़ते हैं।

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