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गुजरात चुनाव: बेटे के प्रचार के लिए उतरी यह लेडी डॉन, ‘दारूवाली’ के नाम से है कुख्यात

शकीना ने कहा "मुझे अपने बेटे पर गर्व है। इस उम्र में भी मैं अपने बेटे को जिताने के लिए हर संभव प्रयास करुंगी।"

Author सूरत | December 1, 2017 10:45 AM
अकरम के एनसीपी से चुनाव लड़ने के कारण कांग्रेस के वोट कट सकते हैं जिसका सीधा फायदा बीजेपी को मिल सकता है। (Express Photo)

गुजरात में आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए सभी पार्टियों ने कमर कस ली है। राज्य में 9 दिसंबर को पहले चरण और 14 को दूसरे चरण के मतदान होने हैं जिनके नतीजे 18 दिसंबर को घोषित किए जाएंगे। सूरत में शकीना दारूवाली के नाम से जानी जानेवाली लेडी डॉन 65 वर्षीय शकीना अंसारी अपने बेटे अकरम के साथ एक जीप में सवार होकर लोगों से उसे वोट देने की अपील करती हुई दिखाई दी। लिम्बयात से पूर्व कांग्रेस पार्षद ने एनसीपी ज्वाइन की है जिसके बाद वे अब एनसीपी के टिकट पर लिम्बयात से विधानसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। फिलहाल इस सीट पर बीजेपी की संगीता पाटिल का कब्जा है। वहीं कांग्रेस ने इस सीट के लिए पूर्व बीजेपी पार्षद रविंद्र पाटिल को चुनावी मैदान में उतारा है। अकरम के एनसीपी से चुनाव लड़ने के कारण कांग्रेस के वोट कट सकते हैं जिसका सीधा फायदा बीजेपी को मिल सकता है।

सूरत में 16 सीटों पर उतारे गए 9 एनसीपी उम्मीदवारों में से एक अकरम भी हैं। लिम्बयात में महाराष्ट्र, उत्तरी भारत के राज्यों और आंध्र प्रदेश के लोगों का प्रभुत्व है। बीजेपी और कांग्रेस उम्मीदवार जो कि महाराष्ट्र से ताल्लुक रखते हैं तो वहीं अकरम उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। अकरम की मां शकीना वाराणसी के एक किसान परिवार से ताल्लुक रखती हैं। जब वे 13 साल की थीं तो उनकी शादी अमानुल्लाह अंसारी नाम के व्यक्ति से कर दी गई थी और वे सूरत आकर रहने लगीं। शकीना और अंसारी के 8 बच्चे हैं जिनमें अकरम सबसे बड़ा है। शकीना के पति अंसारी की मौत हो चुकी है। परिवार चलाने के लिए लेडी डॉन ने महिदरपुरा पुलिस थाने में सफाई करने का काम करना शुरु किया था। शकीना का दावा है कि पुलिसवाले उसे शराब बेचने के लिए दिया करते थे और ऐसा करते-करते वह शराब तस्कर बन गई। तस्करी कर उसने काफी पैसा कमाया और फिर उसने लिम्बयात में अपना घर खरीद लिया।

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में शकीना ने कहा कि लोग आश्चर्यचकित रह जाते थे यह देखकर कि एक महिला शराब बेच रही है। शकीना ने कहा कि जब में 35 साल पहले यहां आई तो लिम्बयात में जंगरराज था। स्थानीय गुंडो द्वारा महिलाओं को प्रताड़ित किया जाता था। एक दिन मैंने देखा कि दो व्यक्ति एक महिला को परेशान कर रहे थे। पहले मैंने उन दोनों को चेतावनी दी लेकिन जब वे नहीं माने तो मैंने उनकी डंडे से पिटाई कर दी। शकीना ने दावा किया कि वह जो भी कमाती है उसमें से कुछ हिस्सा अस्पतालों और स्कूलों को दान में दे देती है। वह पिछले 10-12 सालों से शराब बेचने का काम कर रही है।

वहीं अकरम ने कहा कि बाबरी मस्जिद तोड़फोड़ के समय उसके परिवार ने कई लोगों की मदद की थी। हमने अपने इलाके को निश्चित कर दिया था कि यहां पर किसी भी प्रकार की हिंसा नहीं होगी। लिम्बयात के लोगों के बीच में हमारी काफी अच्छी छवि है। अपने बेटे के बारे में बात करते हुए शकीना ने कहा मुझे अपने बेटे पर गर्व है। इस उम्र में भी मैं अपने बेटे को जिताने के लिए हर संभव प्रयास करुंगी। बीजेपी और कांग्रेस उम्मीदवार मुझे जानते हैं और वे भी काफी अच्छे लोग हैं लेकिन मैं अपने बेटे के लिए काम करुंगी।

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