Daughter of autorickshaw driver scores 99.72 but uncertain about her future in gujarat - गुजरात बोर्ड में ऑटो ड्राइवर की बेटी को मिले 99.72 प्रतिशत अंक, फिर भी भविष्य अधर में - Jansatta
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गुजरात बोर्ड में ऑटो ड्राइवर की बेटी को मिले 99.72 प्रतिशत अंक, फिर भी भविष्य अधर में

फरहाना कहती हैं कि ये कभी मत सोचो की तुम्हारी आर्थिक हालत अच्छी नहीं है तो तुम कुछ कर नहीं सकते। कठिन परिश्रम से सबकुछ संभव हो जाता है।

पिता फारुखभाई के साथ फरहाना (फोटो सोर्स पीटीआई)

गुजरात में कक्षा 12 की साइंस स्ट्रीम के परीक्षा परिणाम घोषित किए जा चुके हैं। 11 मई को जब परीक्षा परिणाम घोषित किए गए तब फरहाना के परिवार का खुशी ठिकाना ना रहा है। क्योंकि इस परीक्षा में ऑटो ड्राइवर फारुखभाई की बेटी फरहाना ने 99.72 फीसदी अंक हासिल किए। शुरू में मेडिकल स्ट्रीम में बेटी फरहाना के इतने अंक लाने पर परिवार का खुशी से ठिकाना ना रहा है लेकिन वित्तीय बाधाओं के कारण अब बेटी को भविष्य को लेकर संकट बना हुआ है। बेटी के परीक्षा में इतने हासिल करने पर फरहाना की मां शमीम बवानी कहती हैं कि कोई खुशी नहीं है हमें। मां आगे कहती हैं कि गुजराती होने की वजह से हमारा परिवार खुश नहीं है क्योंकि नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) की अंग्रेजी में जो परीक्षा थी वो एकदम अलग थी जबकि गुजराती भाषा की परीक्षा ज्यादा कठिन थी।

मां आगे कहती हैं कि ये संयुक्त परीक्षा परिणाम फरहाना और उसके साथ हजारों छात्रों के लिए बिल्कुल भी न्याय संगत नहीं होगा। फरहाना की मां आगे कहती है कि इससे सभी छात्र निराशा थे। वो कहती है कि मेरी बेटी ने इस परीक्षा के इतर भविष्य में अन्य किसी विकल्प पर विचार नहीं किया था। हमारी अब सिर्फ एक ही प्रार्थना है कि सरकार गुजराती और अंग्रेजी माध्यम के परीक्षा परिणाम अलग-अलग घोषित करे। हो सकता है इसमें बेटी को कोई विकल्प मिल जाए।

अहमदाबाद के रायखंड इलाके में रहने वाली फरहाना की मां आगे कहती हैं कि उनकी बेटी ने चारों सेमेस्टर में अच्छे अंक हासिल किए। उसने बहुत मेहनत की लेकिन इसका क्या मतलब था। दो साल के लिए मेरी बेटी सोना और खाना दोनों भूल गई थी। उसने अपना सारा वक्त सिर्फ पढ़ाई में ही गुजारा। फरहाना की मां शमीम बवानी के अनुसार बेटी का बचपन से सिर्फ एक ही सपना था कि वो बड़े होकर डॉक्टर बने। बेटी ने माता-पिता से प्रभावित होकर अन्य विषयों की तुलना में साइंस को अपना मुख्य विषय चुना।

वहीं, NEET की परीक्षा अलग-अलग होने पर जमालपुर के एफडी हाई स्कूल में पढ़ने वाली फरहाना कहती हैं कि NEET का गुजराती भाषा का पेपर बेहद कठिन था जबकि अंग्रेजी भाषा में आया NEET का पेपर काफी सरल था। वो कहती हैं कि परीक्षा में नियम काफी कठिन थे। फरहाना कहती हैं कि परीक्षा से पहले उन्हें पूरा भरोसा था कि उनका परीक्षा परिणाम बहुत अच्छा आएगा और मुझे मुफ्त में एमबीबीएस की सीट मिलेगी। मगर मेरी परीक्षा अच्छी नहीं गई।

बता दें कि पांच सदस्यों वाले फरहाना के परिवार में पिता महीने में करीब 8 से 10 हजार ही कमा पाते हैं। फरहाना के परिवार ने बेटी को उच्च शिक्षा दिलाने के लिए बहुत मेहनत की। क्योंकि परिवार का मानना था उनके परिवार में बेटी पहली सदस्य होगी जोकि अपना सपना पूरा करेगी और उच्च शिक्षा हासिल करेगी। वहीं फरहाना के पिता फारुखभाई कहते हैं कि मैंने 12वीं तक पढ़ाई की है जबकि पत्नी 10वीं तक शिक्षा हासिल की है। हमारे परिवार के किसी सदस्य ने 12वीं से आगे की पढ़ाई नहीं की बेटी परिवार की ऐसी सदस्य होती जोकि कक्षा 12 से आगे की पढ़ाई करती।

दूसरी तरफ फरहाना बताती हैं कि पिता ऑटोरिक्शा चलाते हैं इसलिए परिवार में आर्थिक समस्या बनी रहती है लेकिन फिर भी परिवार ने पढ़ाई को लेकर पूरा समर्थन किया। पढ़ाई से जुड़ी हर चीज मुझे मुहैया कराई। फरहाना आगे कहती हैं कि ये कभी मत सोचो की तुम्हारी आर्थिक हालत अच्छी नहीं है तो तुम कुछ कर नहीं सकते। कठिन परिश्रम से सबकुछ संभव हो जाता है।

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