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दलितों और अल्पसंख्यकों के बीच ‘पैदल चर्चा’ प्रोग्राम से इमेज चमकाने में जुटी अहमदाबाद पुलिस

2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चाय पर चर्चा नाम से एक कार्यक्रम शुरू किया था

चित्र का इस्तेमाल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है।

2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चाय पे चर्चा नाम से एक कार्यक्रम शुरू किया था ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचा जा सके। अब इसी कदम को अहमदाबाद पुलिस भी अपना रही है, लेकिन उसके इस कार्यक्रम का नाम है पैदल चर्चा। इसके जरिए वह अपने और अल्पसंख्यक समुदाय के रिश्तों पर जमी बर्फ को पिघलाना चाहती है। इस समुदाय पर 2002 के गुजरात दंगों के बाद काफी अत्याचार हुए थे। टाइम्स अॉफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक पैदल चर्चा कार्यक्रम पिछले हफ्ते शुरू किया गया था। इसके तहत पुलिस अफसर बाहर निकलकर अल्पसंख्यक, दलित और ओबीसी इलाकों के लोगों से मिलते हैं और उनके साथ चाय पीकर स्थानीय मुद्दों पर चर्चा करते हैं। वरिष्ठ अफसरों का कहना है कि इस कदम से पुलिस स्थानीय लोगों से जुड़कर उनका विश्वास जीत सकती है और उन्हें उन लोगों से इलाके में हो रही गैरकानूनी गतिविधियों के बारे में भी जानकारी मिल सकती है।

अहमदाबाद के सेक्टर 1 के जॉइंट पुलिस कमिश्नर पीयूष पटेल ने कहा कि पैदल चर्चा का मकसद पुलिस और विभिन्न समुदायों व जातियों के बीच की दूरियों को पाटना है। इसके अलावा डिपार्टमेंट में उनका विश्वास जीतने की भी यह एक कोशिश है। उन्होंने कहा कि यह कदम एक एनजीओ की मदद से उठाया गया है जो अब हर महीने होगा। इसके जरिए इलाके का इंस्पेक्टर लोगों खासकर महिलाओं तक पहुंचेगा और उनके मुद्दों के बारे में जानेगा। हाल ही में अहमदाबाद पुलिस के अफसरों ने गोमतीपुर, शाहपुर, करांज और गायकवाड़ इलाकों में एेसी ही बैठकें आयोजित कीं। इन बैठकों में ईव-टीजिंग, घरेलू मामले और महिलाओं के जुड़े मुद्दों पर ध्यान दिया गया। इस बैठक में जमालपुर के सामाजिक कार्यकर्ता निलोफर मंसूरी भी शामिल थे।

मंसूरी ने कहा कि हम घरेलू मुद्दों पर ध्यान दे रहे हैं और इस पहल से महिलाओं में इतना ज्यादा आत्मविश्वास आ गया है कि वह खुद आगे आकर अपने इलाके के बारे में बता रही हैं। मंसूरी ने बताया कि रविवार रात को गायकवाड़ हवेली पुलिस थाने के इंस्पेक्टर जिग्नेश राठवा और उनकी टीम ने इलाके का दौरा किया था। यहां करीब 35 महिलाएं रोटी बना रही थीं। उन्होंने जिविका चलाने के दौरान आ रही मुश्किलों के बारे में उन्हें बताया। राठवा ने कहा कि वह उन्हें रेलवे द्वारा चलाए जाने वाले सेल्फ हेल्प ग्रुप (एसएचजी) से जोड़ेंगे ताकि उन्हें विक्रेताओं की तरह व्यापार मिल सके। इसके साथ पुलिस रथ घर-घर जाकर लोगों की शिकायतें दर्ज करते हैं।

एक मंदिर जहाँ पुलिस वाले होते हैं पुजारी, देखें वीडियो ः

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