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चिंतन शिविर नहीं गया क्योंकि सरेंडर करते नहीं दिखना चाहता था, आप की तारीफ कर हार्दिक बोले- बेस्ट ऑप्शन देख रहा

गुजरातः वो कहते हैं कि ऑफर और बारगेनिंग कमजोर के लिए होते हैं। मजबूत अपनी जगह खुद बनाते हैं। वो जहां भी होंगे चुनाव में मजबूती से दिखेंगे।

HARDIK PATEL
हार्दिक पटेल। (एक्सप्रेस फोटो)

कांग्रेस को अलविदा कहने के बाद हार्दिक पटेल के तेवर ज्यादा ही तल्ख होते दिख रहे हैं। मसला चिकन सैंडविच का हो या फिर राहुल को नासमझ को बताना। हर बात से झलक रहा है कि वो कांग्रेस आलाकमान से किस कदर नाराज हैं। इंडियन एक्सप्रेस से एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि वो उदयपुर के चिंतन शिविर में जानकर नहीं गए, क्योंकि सरेंडर करते नहीं दिखना चाहते थे। राहुल गांधी अगर अपनी गुजरात यात्रा में पांच मिनट उनके लिए नहीं निकाल सकते तो उन्हें भी उनकी या पार्टी की परवाह करने की क्या जरूरत आन पड़ी है।

हार्दिक का कहना था कि उन्होंने अभी तक ये तय नहीं किया है कि कौन सी पार्टी उनके लिए बेस्ट साबित होगी। वो बीजेपी में जाने के संकेत के बीच आप की भी तारीफ करते दिख रहे हैं। उनका कहना था कि कांग्रेस की बजाए आप की रणतीति ज्यादा एग्रेसिव दिख रही है। कांग्रेस कुछ जगहों पर खुद को समेटे हुए है तो आप सूबे के चारों कोनों में दिख रही है। छोटे से छोटे मुद्दे पर भी आप नेता मीडिया में छाए रहते हैं। हालांकि वो ये भी कहते हैं कि आप का इस बार के असेंबली चुनाव में नंबर नहीं लगने वाला। वो अगले चुनाव में बेहतर कर सकते हैं।

बीजेपी की तारीफ करते नहीं अघा रहे हार्दिक का मानना है कि मौजूदा सरकार ज्यादा अच्छी है। इसमें कोई बड़ा करप्शन देखने को नहीं मिल रहा। अगर है तो कांग्रेस सच को सामने क्यों नहीं लाती। गुजरात में नरेंद्र भाई (पीएम मोदी) के लिए एक अलग ही तरह की भावना है। लोग उन्हें देखना चाहते हैं। सुनना चाहते हैं। वो चाहते हैं कि पीएम का जलवा बरकरार रहे। नरेंद्र भाई ने जिसे भी चेहरा बनाया उसे जनता ने भरपूर प्यार दिया। उनका कहना था कि पिछले चुनाव में विजय भाई (रूपाणी) चेहरा थे तो इस बार मोदी जी ने भूपेंद्र भाई (पटेल) पर भरोसा जताया है। वो जानते हैं कि चेहरा चुनाव में अहम होता है।

पाटीदार नेता का कहना था कि कांग्रेस अपने पत्ते ही नहीं खोलना चाहती। आलाकमान अपने ही नेताओं को कमजोर करने में लगा रहता है। आप किसी अच्छे नेता की सिफारिश करो तो उस पर अमल नहीं होगा। लेकिन कोई दूसरा उसे लेकर ऊपर पहुंच जाए तो उसे बेहतरीन पद मिल जाता है। हार्दिक का कहना था कि वो जब कांग्रेस में नहीं थे तो अच्छे थे। पार्टी में आने के बाद उनकी आवाज ही बंद कर दी गई। पोस्टरों से उनकी तस्वीर गायब थी।

कांग्रेस छोड़ने की बात सोचने वाले लम्हे पर वो कहते हैं कि जब मेरे पिता की मौत पर एक भी कांग्रेस नेता नहीं पहुंचा तो तभी उन्होंने सोच लिया था कि कोई दूसरी राह पकड़नी है। हालांकि अभी तक किस पार्टी ने उन्हें ऑफर दिया है, इसके सवाल पर वो कहते हैं कि ऑफर और बारगेनिंग कमजोर के लिए होते हैं। मजबूत अपनी जगह खुद बनाते हैं। वो जहां भी होंगे चुनाव में मजबूती से दिखेंगे।

हालांकि उनके सुर पहले से बदले भी दिख रहे हैं। वो बीजेपी की तारीफ करते हैं और उसमें जाने की बात भी करते हौैं। लेकिन जब उनसे राज्य के मुद्दे पूछे जाते हैं तो वो कहते हैं कि पेपर लीक बड़ा मसला है। स्कूलों और अस्पतालों की दशा को सुधारने की जरूरत है। यानि वो आप के एजेंडे को भी नहीं छोड़ रहे। उनका कहना है कि अपने लोगों से मीटिंग करते वो कोई ठोस फैसला लेंगे।

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