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गुजरात: भाजपा के लिए नई मुसीबत, अब आदिवासी आंदोलन की तैयारी में, शांत करने में जुटे पीएम मोदी

भाजपा के बड़े नेताओं का कहना है कि मोदी का आदिवासी इलाकों में जाना पार्टी का लोगों से जुड़ने का प्रयास है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह। (FILE PHOTO)

गुजरात में सत्‍तारूढ़ भाजपा के लिए पाटीदारों और दलितों के बाद अब आदिवासी समुदाय मुसीबत खड़ी कर सकता है। राज्‍य के आदिवासी इलाकों में भिलीस्‍तान आंदोलन रफ्तार पकड़ रहा है। इसका सामना करने के लिए पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सहारे है। भाजपा के एक आला नेता ने बताया, ”राज्‍य सरकार ने पहले पाटीदारों और अब दलितों की चुनौती का सामना किया। हम जानते हैं कि अगले साल विधानसभा चुनावों से पहले आदिवासी नेता विद्रोह करने की तैयारी कर रहे हैं। इसके पीछे कुछ और लोग भी हैं जो अपने राजनीतिक हितों के लिए उन्‍हें बढ़ावा दे रहे हैं। पीएम मोदी राज्‍य की राजनीति में हो रहे बदलावों पर नजर रखे हुए हैं। आने वाले दिनों में हम उन्‍हें गुजरात में और अधिक देखेंगे।”

पीएम अपने जन्‍मदिन पर गुजरात जाएंगे। इस दौरान वे आदिवासी बहुल दाहोद और नवसारी में सभाओं को संबोधित करेंगे। भाजपा के बड़े नेताओं का कहना है कि मोदी का आदिवासी इलाकों में जाना पार्टी का लोगों से जुड़ने का प्रयास है। गुजरात में भाजपा लगभग दो दशक से सत्‍ता में है लेकिन पहली बार उसके लिए राजनीतिक जमीन बचाना मुश्किल होता दिख रहा है। उसका साथ देने वाला पटेल समुदाय आंदोलन की मांग को लेकर उसके खिलाफ खड़ा है। ऊना में दलित युवकों की पिटाई ने समस्‍या को और बढ़ा दिया। पटेलों को फिर से अपने पाले में लाने के लिए भाजपा सौराष्‍ट्र क्षेत्र को काफी प्रतिनिधित्‍व दे रही है।

मुख्यमंत्री विजय रुपाणी और गुजरात भाजपा अध्‍यक्ष जीतू वाघानी दोनों सौराष्‍ट्र से आते हैं। हालांकि रुपाणी जैन समुदाय से हैं और उन्‍हें आनंदीबेन पटेल की जगह सीएम बनाया गया। आनंदीबेन पटेल समुदाय से हैं।। रुपाणी के सीएम बनाए जाने से नाराज पटेलों को साधने के लिए नितिन पटेल को डिप्‍टी सीएम बना दिया गया। साथ ही गुजराज भाजपा अध्‍यक्ष जीतू वाघानी भी पटेल समुदाय से हैं। पिछले साल हुए तालुका और पंचायत चुनावों में कांग्रेस ने इस क्षेत्र में जीत दर्ज की थी। उसने राजकोट, सुरेंद्रनगर, अमरेली और मोरबी में पंचायत चुनावों में जीत दर्ज की थी। हालांकि शहरी निकायों में भाजपा ने अपना दबदबा बनाए रखा था। लेकिन कांग्रेस ने कई दशक बाद भाजपा को चुनौती दी थी।

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ग्रामीण इलाकों में कांग्रेस के लिए अच्‍छी खबर थी। डेढ़ दशक से गुजरात में सत्‍ता में बैठी भाजपा के लिए यह खतरे की घंटी थी। आनंदीबेन की विदाई में भी यह नतीजे बड़ा कारण बताए जा रहे हैं। हालांकि इसी अवधि में गिर सोमनाथ जिले की तलाला विधानसभा सीट भाजपा ने उपचुनाव में लंबे समय बाद जीती थी। नरेंद्र मोदी के गुजरात की सत्‍ता में रहने के दौरान भाजपा को कोई समस्‍या नहीं हुर्इ। उनके शासन में कांग्रेस का आंकड़ा घटता चला गया और वह कभी टक्‍कर में नहीं दिखी।

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मोदी के पीएम बनते ही गुजरात में भाजपा के लिए समस्‍याएं शुरू हो गई। इन्‍हें देखते हुए कांग्रेस और आम आदमी पार्टी अपने लिए अवसर देख रही हैं। आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पिछले दिनों गुजरात का दौरा भी किया था। वे पाटीदार आंदोलन को भी समर्थन दे रहे हैं। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा को गुजरात में काफी चीजों को फिर से अपने पाले में लाना होगा।

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