ताज़ा खबर
 

महात्‍मा गांधी ने की थी स्‍थापना, अब वही प्रेस छाप रही नरेंद्र मोदी की किताबें

देश को आजादी दिलाने में सबसे आगे रहे गांधी ने 100 साल पहले नवजीन प्रेस की स्थापना की थी।

साल 1919 में महात्मा गांधी ने अपने मूल उद्देश्यों के लिए नवजीवन मुद्रानयालय की स्थापना की थी। नवजीवन मुद्रानलय ने पिछले साल गुजराती में समकालीन लेखकों के कार्यों को मुद्रित करने के लिए ‘नवजीवन सम्प्रत’ (समकालीन नवजीवन) नामक एक अलग प्रकाशन विंग की स्थापना की है।

करीब 100 साल पहले जिस प्रेस की स्थापना महात्मा गांधी ने की थी अब वहां प्रधानमंत्री नरेंद्र की किताबें छप रही हैं। देश को आजादी दिलाने में सबसे आगे रहे गांधी ने 100 साल पहले नवजीन प्रेस की स्थापना की थी। हालांकि अब यहां पीएम मोदी की किताबें छापी जा रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इस साल मार्च से नवजीवन प्रेस ने मोदी द्वारा लिखी ‘एग्जाम वारियर’ की 15,000 प्रतियां छापी हैं। खास बात यह है कि पीएम मोदी ऐसे तीसरे प्रधानमंत्री बन गए हैं जिनकी किताबें महात्मा गांधी की प्रेस में छापी गई हो। इससे पहले इस प्रेस में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहलाल नेहरू और मोरारजी देसाई की किताबें छापी जा चुकी हैं।

साल 1919 में महात्मा गांधी ने अपने मूल उद्देश्यों के लिए नवजीवन मुद्रानयालय की स्थापना की थी। नवजीवन मुद्रानलय ने पिछले साल गुजराती में समकालीन लेखकों के कार्यों को मुद्रित करने के लिए ‘नवजीवन सम्प्रत’ (समकालीन नवजीवन) नामक एक अलग प्रकाशन विंग की स्थापना की है। मामले में नवजीवन प्रकाशन के ट्रस्टी कपिल रावल कहते हैं कि पीएम मोदी की किताबें में नवजीवन सम्प्रत में छापी गई हैं। रावल कहते हैं कि पुस्तक प्रकृति में सभी राजनीतिक नहीं हैं और ये गांधी जी के विचारों टकराती नहीं हैं।

कपिल रावल के मुताबिक, ‘प्राइमरी पब्लिकेशन डिविजन नवजीवन मुद्रनालय गांधीजी के विषय-वस्तु लेखन प्रकाशित करना जारी रखेंगे। गांधीजी के व्यक्तित्व और उनके विचारों के विभिन्न पहलुओं को दर्शाते हुए किताबों और डायरियों का प्रकाशन जारी रहेगा।

जानकारी के मुताबिक पीएम मोदी की किताबों की सबसे ज्यादा मांग हिरामनी स्कूल के ट्रस्टी नरहरी अमीन ने की है। उन्होंने 4,500 किताबें छापने का ऑर्डर दिया है। अमीन पूर्व में कांग्रेस में थे और साल 2012 में भाजपा में शामिल हो गए।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App