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अपना धर्म ‘सेक्युलर’ घोषित करवाने के लिए कोर्ट की शरण में पहुंचा यह ऑटो ड्राइवर

याचिकाकर्ता ने कहा कि वो जिला कलेक्टर द्वारा उनकी अपील को खारिज करने के बाद हाईकोर्ट पहुंचे हैं। जिला कलेक्टर ने नास्तिक धर्म अपनाने की उनकी अपील को पिछले साल मई में खारिज कर दिया।

अपना धर्म ‘सेक्युलर’ घोषित करवाने के लिए कोर्ट की शरण में पहुंचा यह ऑटो ड्राइवर
तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (फाइल फोटो)

अहमदाबाद के एक शख्स ने गुजरात हाईकोर्ट में खुद का धर्म ‘धर्मनिरपेक्ष’, ‘नास्तिक’ या ‘राष्ट्रवादी’ करने की मांग की है। हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में 34 साल के राजवीर उपाध्याय ने लिखा है कि भारत का संविधान किसी भी धर्म को मानने की अनुमति देता है। वह धार्मिक भेदभाव से पीड़ित हैं, इसलिए वह अपने धर्म को ‘सेक्युलर’ या ‘राष्ट्रवादी’ के रूप में वर्णित करना चाहते हैं। याचिकाकर्ता के मुताबिक ये इस देश का मूल्य हैं। उपाध्याय ने इसके अलावा गुजरात फ्रीडम ऑफ रिलिजन एक्ट में जरूरी संशोधन की मांग की है। क्योंकि इसमें धर्मनिरपेक्षता और नास्तिकता का ज्रिक नहीं है। पेशे से ऑटो ड्राइवर राजवीर ने इससे पहले जिला कलेक्टर और राजकोट राजपत्र ऑफिस में धर्म बदलने की अपील की थी। वहां उसकी दरखास्त मंजूर नहीं की गई।

याचिकाकर्ता ने कहा कि वो जिला कलेक्टर द्वारा उनकी अपील को खारिज करने के बाद हाईकोर्ट पहुंचे हैं। जिला कलेक्टर ने नास्तिक धर्म अपनाने की उनकी अपील को पिछले साल मई में खारिज कर दिया। जबकि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के मुताबिक भारत के हर नागरिक को किसी भी धर्म को मानने और उसका प्रचार करने का पूरा अधिकार है। इसलिए जिला कलेक्टर द्वारा उनकी अपील को रद्द करना अवैध है। इसे खारिज किया जाना चाहिए। गुजरात फ्रीडम ऑफ रिलिजन एक्ट में सशोधन की मांग करते हुए उपाध्याय ने कहा है कि यह एक्ट वांछनीय धर्म या नास्तिक धर्म का अभ्यास करने की स्वतंत्रता का उल्लंघन करता है। जबकि भारतीय संविधान किसी भी धर्म का अभ्यास करने की पूरी आजादी देता है। इसलिए संविधान द्वारा दी गई स्वतंत्रता को सुरक्षित रखने के लिए इसमें संशोधन जरूर होना चाहिए।

बता दें कि राजवीर उपाध्याय गुरु-ब्राह्मण जाति से आते हैं, जो अनुसूचित जाती (SC) में आती है। उन्होंने अंग्रेजी के न्यूज पोर्टल टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि नास्तिक या सेक्युलर के रूप में जानने की मेरी अपील को संबंधित अधिकारियों ने खारिज कर दिया। इसके बाद मैंने हाईकोर्ट से मामले में दखल देनी की अपील की है। अगर यहां भी मुझे नास्तिक या सेक्युलर के रूप में मेरे धर्म का वर्णन करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है तो मुझे कम से कम एक राष्ट्रवादी के रूप में जानने की अनुमति दी जाए। इसमें तो किसी को परेशानी नहीं होनी चाहिए।

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