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उठ गया न्याय व्यवस्था से विश्वास, 11 दोषियों की रिहाई के बाद बिलकिस बानो ने पहली बार बयां किया अपना दर्द

बिलकिस बानो का कहना है कि उनके जैसी बहुत सी महिलाएं हैं जिन्हें अपने साथ हुई यातना में कोर्ट से न्याय की दरकार है। लेकिन ऐसी औरतों को अब ठेस लगेगी।

उठ गया न्याय व्यवस्था से विश्वास, 11 दोषियों की रिहाई के बाद बिलकिस बानो ने पहली बार बयां किया अपना दर्द
बिलकिस बानो। (एक्सप्रेस फोटो)

अपने साथ हुए गैंग रेप के 11 दोषियों की गोधरा जेल से रिहाई के बाद बिलकिस बानो ने पहली बार अपना दर्द बयां किया। अपने साथ हुए वाकये को याद करके भी सिहरने वाली महिला का कहना है कि उनका न्याय व्यवस्था से ही विश्वास उठ गया है। वो कहती हैं कि दोषियों की रिहाई से पहले किसी ने भी उनकी और उनके परिवार की सुरक्षा के बारे में कोई ख्याल नहीं किया।

बिलकिस बानो का कहना है कि उनके जैसी बहुत सी महिलाएं हैं जिन्हें अपने साथ हुई यातना में कोर्ट से न्याय की दरकार है। लेकिन ऐसी औरतों को अब ठेस लगेगी। वो केवल अपनी बेटी को याद कर रही हैं। फैसले के बाद से ही सदमे में जा चुकी हैं। उनके पास शब्द नहीं हैं अपने दर्द को बयां करने के। बिलकिस का कहना है कि कोई उन्हें उनका वो अधिकार तो वापस दे दो जो उन जैसी औरतों को सुरक्षित माहौल में रहने का यकीन दिलाता है। बिलकिस ने कहा कि कृपया मुझे अकेला छोड़ दो। मैंने अपनी बेटी सालेहा की आत्मा के लिए दुआ की है। वो इस फैसले से स्तब्ध हैं।

उनको ये यकीन ही नहीं हो रहा है कि 2002 के दंगों के मामले में 11 दोषियों को रिहा कर दिया गया है। बानो के पति याकूब रसूल ने कहा कि दोषियों को रिहा किए जाने की खबर से वो हैरत में हैं। उन्हें मीडिया से सारी जानकारी मिली। सोमवार को गुजरात सरकार ने अपनी क्षमा नीति के तहत इनकी रिहाई की मंजूरी दी थी। गोधरा जेल से सोमवार को रिहा होने के बाद दोषियों को माला पहनाकर स्वागत किया गया और मिठाइयां बांटी गईं।

रसूल ने कहा कि रहने के लिए उनके पास कोई स्थायी जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि हमें इसकी कोई जानकारी नहीं थी कि दोषियों ने कब माफी के लिए आवेदन किया और राज्य सरकार ने क्या फैसला लिया। हमें कभी कोई नोटिस नहीं मिला। हमें इस बारे में नहीं बताया गया। हम बस दंगों में जान गंवाने वाले अपने परिजनों की आत्मा की शांति की प्रार्थना करते हैं। हम अपनी बेटी समेत इस घटना में मारे गए लोगों को हर दिन याद करते हैं।

रसूल ने कहा कि गुजरात सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा दिया है। लेकिन सरकार ने नौकरी या मकान की कोई व्यवस्था नहीं की है। रसूल ने कहा कि उनका परिवार अब भी छिपकर रह रहा है। गौरतलब है कि सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने 11 दोषियों को गैंग रेप और सात लोगों की हत्या के आरोप में 2008 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। बांबे हाईकोर्ट ने सजा को बरकरार रखा था।

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