scorecardresearch

‘लेफ्ट विचारधारा’ के जिग्नेश का पिता भी रैली में देते हैं साथ, पर मां को सताता है डर, जानें- परमार से कैसे बन गए मेवानी

जिग्नेश मेवानी को असम पुलिस ने गिरफ्तार किया था लेकिन कोर्ट ने जिग्नेश मेवानी को जमानत दे दी। कोर्ट ने जमानत देते हुए असम पुलिस को फटकार भी लगाई।

jignesh mevani| gujarat| mla|
गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवानी। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

गुजरात से निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवानी को शुक्रवार को असम की जिला अदालत से जमानत मिल गई। साथ ही कोर्ट ने असम पुलिस को फटकार भी लगाई। बता दें कि असम पुलिस ने उन्हें पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक ट्वीट करने के लिए गिरफ्तार किया गया था। जैसे ही जिग्नेश को कोर्ट से जमानत मिली पुलिस ने तुरंत उन्हें महिला कॉन्स्टेबल से अभद्र व्यवहार करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।

जिग्नेश मेवानी के 69 वर्षीय पिता के लिए जिग्नेश हमेशा एक आदर्शवादी व्यक्ति थे। उन्होंने जिग्नेश के बारे में इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा, “वह एक क्रांति लाने की बात करते थे और मैं कहूंगा कि ऐसी क्रांति 1947 से पहले ही हुई थी। वह कहते हैं कि मैं जेल जाने के लिए तैयार हूं। उसने हमें सबसे बुरे के लिए तैयार किया है। अगर वे उन्हें (जिग्नेश) इतनी छोटी सी बात के लिए असम ले जा सकते हैं, तो मैं सोच भी नहीं सकता कि वे आगे क्या करेंगे। हम बीजेपी से बहुत डरे हुए हैं।”

जिग्नेश मेवानी की अधिकांश राजनीतिक यात्रा के दौरान उनका परिवार उनके साथ खड़ा रहा है। ऊना मार्च में उनका पूरा परिवार उनके साथ था। उनके पिता नटवरभाई परमार ने जिग्नेश मेवानी की अधिकांश रैलियों में भाग लिया है और 2017 में वडगाम में 20 गांवों की कमान संभालते हुए उनके लिए प्रचार भी किया था। नटवरभाई अपने बेटे की रिहाई की मांग को लेकर हाल के सभी प्रदर्शनों में भी शामिल थे।

जिग्नेश मेवानी का जन्म 1980 में जिग्नेश परमार के रूप में हुआ था। लेकिन उनके पिता 70 के दशक के मध्य में मेउ चले गए, जहां जाने के बाद जिग्नेश ने अपने सरनेम से परमार हटाकर मेवानी कर लिया। मेवानी सरनेम जिग्नेश के मेउ गांव से जुड़ा हुआ है और गांव से खुद को जोड़ने के लिए उन्होंने ऐसा क्या किया था।

मेवानी के एक करीबी सूत्र ने बताया, “मेवानी वामपंथी विचारधाराओं का मूल रूप से पालन करते हैं। उनका कांग्रेस के साथ जाने का कोई इरादा नहीं था और उन्हें राजी करना कठिन था। लेकिन कन्हैया के बिहार में शामिल होने के बाद ही पार्टी के साथ गठबंधन करने के लिए सहमत हुए।” हालांकि जिग्नेश मेवानी कांग्रेस में शामिल नहीं हुए हैं क्योंकि ऐसा करने से उनकी विधायक सदस्यता जा सकती है। लेकिन जिग्नेश कांग्रेस को समर्थन करते रहते हैं।

जिग्नेश तब चर्चा में आए जब 11 जुलाई 2016 गिर सोमनाथ जिले के तत्कालीन ऊना तालुका के मोटा समाधियाला गांव के एक दलित परिवार के चार सदस्यों को गौरक्षकों ने पीटा था, तब जिग्नेश ने वकील और एक्टिविस्ट के रूप में अहमदाबाद से ऊना के लिए एक मार्च शुरू किया और स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराया। उनका नारा था, “आप गाय की पूंछ रख सकते हैं लेकिन हमें हमारी जमीन वापस दे दो।” राज्य में भाजपा के लिए यह पहली खुली चुनौती थी।

पढें अहमदाबाद (Ahmedabad News) खबरें, ताजा हिंदी समाचार (Latest Hindi News)के लिए डाउनलोड करें Hindi News App.