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सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस की जांच करने वाले आईपीएस ने मांगा वीआरएस, वजह नहीं बताई

सूत्रों के मुताबिक उन्होंने 24 अगस्त को गृह मंत्रालय को एक पत्र लिखा। इसमें उन्होंने लिखा कि वह निजी कारणों से वीआरएस लेना चाहते हैं।

Author August 30, 2018 5:43 PM
सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस में रजनीश राय ने तब अपने सहयोगी डीआईजी डीजी वंजारा सहित कई अन्य लोगों को गिरफ्तार किया था। उन्होंने इसके अलावा असम में आर्मी द्वारा फर्जी एनकांउटर की भी जानकारी दी थी। (फोटो सोर्स इंडियन एक्सप्रेस)

गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी और सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस की जांच करने वाले रजनीश राय ने वीआरएस यानी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की मांग की है। सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस में रजनीश राय ने तब अपने सहयोगी डीआईजी डीजी वंजारा सहित कई अन्य लोगों को गिरफ्तार किया था। उन्होंने इसके अलावा असम में आर्मी द्वारा फर्जी एनकांउटर की भी जानकारी दी थी। कहा जा रहा है कि राय ने समय से पहले रिटायरमेंट की वजह से निजी बताई है। हालांकि मामले में निजी तौर पर उनका पक्ष नहीं मालूम हो सका है। मगर उनके करीबी लोगों का दावा है कि वह एकेडमिक्स क्षेत्र में जाना चाहते हैं। इसलिए वह समय से पहले पद से रिटायर होना चाहते हैं। रजनीश राय वर्तमान में आंध्र प्रदेश के चित्तूर में स्थित सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) के काउंटर इंसरजेंसी एंड एंटी टेररिज्म (सीआईएटी) में तैनात हैं।

सूत्रों के मुताबिक उन्होंने 24 अगस्त को गृह मंत्रालय को एक पत्र लिखा। इसमें उन्होंने लिखा कि वह निजी कारणों से वीआरएस लेना चाहते हैं। सूत्रों का यह भी कहना है कि आईपीएस रजनीश राय कई मामलों में पूछताछ का सामना कर रहे हैं। इसमें असम में आर्मी द्वारा कथित तौर फर्जी एनकाउंटर की सूचना के मामले में भी उनसे पूछताछ की जा रही है। गृह मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि जांच पूरी होने वाली है, इसलिए मामले में निर्णय जांच के परिणाम के आधार पर लिया जाएगा।

बता दें कि 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी राय के नेतृत्व में सोहराबुद्दीन शेख के फर्जी एनकाउंटर मामले में दर्जनों पुलिस अफसरों को गिरफ्तार किया गया था। मामले में डीजी वंजारा के अलावा आईपीएस अधिकारी राजकुमार पांडियन और दिनेश एमएन को भी गिरफ्तार किया गया था। हालांकि इन गिरफ्तारियों के बाद राय सत्ता की आंखों की किरकिरी बन गए। बाद में काफी विवादित हो चुके और चर्चा में रहे इस मामले की जांच देश की सबसे बड़ी अदालत की निगरानी होने लगी थी। हालांकि इन गिरफ्तारियों के बाद राय ज्यादा दिनों तक इस जांच का हिस्सा नहीं रह सके।

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