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गुजरातः सांप्रदायिक झड़प से न था जिनका लेना-देना, रामनवमी हिंसा के बाद उनके घरों पर प्रशासन ने चला दिया बुलडोजर

अतिक्रमण विरोधी अभियान को लेकर साबरकांठा के पुलिस अधीक्षक विशाल वाघेला ने बताया कि 10 अप्रैल को हुई सांप्रदायिक झड़प से इसका कोई लेना-देना नहीं है। नगर पालिका ने इसके संबंध में लोगों को वर्ष 2020 में ही नोटिस दिया था।

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हिम्मतनगर में अवैध अतिक्रमण पर चलाया बुलडोजर (Express File Photo)

मध्यप्रदेश और दिल्ली की तरह गुजरात में भी अवैध अतिक्रमण पर कार्रवाई शुरू हो गई है। गुजरात के हिम्मतनगर शहर में नगर पालिका ने मंगलवार को एक इलाके में अतिक्रमण विरोधी अभियान के तहत झोंपड़ियों, छोटे दुकान और एक दुकान की इमारत के एक हिस्से को ध्वस्त कर दिया। इस महीने रामनवमी के जुलूस के दौरान यहां सांप्रदायिक झड़पें भी हुई थीं।

साबरकांठा जिले के हिम्मतनगर के मुख्य नगरपालिका अधिकारी नवनीत पटेल ने कहा कि, “अतिक्रमण विरोधी अभियान में हमने छपरिया में टीपी रोड पर 3-4 खोखे, 2-3 झोंपड़ियों और दो मंजिला दुकान की इमारत को हटाया है। 15 मीटर सड़क पर करीब तीन मीटर तक अवैध निर्माण भवन मालिकों द्वारा किया गया था। हमने 2020 में नोटिस भेजा था। यह एक नियमित अतिक्रमण विरोधी अभियान था और 10 अप्रैल को हुई घटनाओं से इसका कोई लेना-देना नहीं है। हम अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह की कार्रवाई करना जारी रखेंगे।”

साबरकांठा के एसपी विशाल वाघेला ने इस अभियान पर कहा कि, “दंगा के आरोपियों से इसका कोई लेना-देना नहीं है। 10 अप्रैल को इलाके में हुई सांप्रदायिक झड़पों में ध्वस्त की गई संपत्तियों का किसी भी आरोपी से कोई लेना-देना नहीं था। मंगलवार को जब नगर पालिका ने हमें अतिक्रमण विरोधी अभियान की सूचना दी थी, तब पुलिस बंदोबस्त की व्यवस्था की गई थी।”

दो मंजिला इमारत हिम्मतनगर के एक स्थानीय सामाजिक-धार्मिक संगठन अशरफनगर जमात की है। इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए जमात के एक सदस्य कलूमिया शेख ने कहा कि, “इमारत में एक सिगरेट की दुकान, एक बिजली की मरम्मत की दुकान और एक किराने की दुकान थी। यह सही है कि तीन मीटर विस्तार को लेकर नगर पालिका ने हमें 2020 में नोटिस भेजा था। सोमवार को स्थानीय अधिकारियों ने हमें इस अभियान के बारे में बताया। आज हमने उन्हें अतिक्रमित हिस्से को हटाने में मदद की।”

बता दें कि 10 अप्रैल को रामनवमी के जुलूस के दौरान छपरिया में सांप्रदायिक झड़प हुई थी जिससे पथराव, दंगा और आगजनी हुई और ये करीब तीन-चार घंटे तक चली। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के कई गोले दागे थे और 22 लोगों को गिरफ्तार किया था। 11 अप्रैल को हिम्मतनगर के वंजारावास इलाके में पथराव की सूचना मिली थी जिसके बाद पुलिस ने इलाके से 10 लोगों को गिरफ्तार किया था।

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