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चुनाव 2017: गुजरात और कर्नाटक में जाति समीकरण साधेगी कांग्रेस

गुजरात और कांग्रेस में विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर कांग्रेस पार्टी फूंक-फूंककर कदम उठा रही है।

Author नई दिल्ली | June 13, 2017 5:01 AM
कांग्रेस

दीपक रस्तोगी 

गुजरात और कांग्रेस में विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर कांग्रेस पार्टी फूंक-फूंककर कदम उठा रही है। अपने पारंपरिक वोटरों में नए जाति समूहों को जोड़ने के लिए खास रणनीति तैयार की जा रही है। दोनों राज्यों के लिए अलग-अलग कमेटियां गठित की गई हैं, जिनमें कांग्रेस के जाति समूहों के नेताओं को अहमियत दी गई है। कर्नाटक में कांग्रेस के पारंपरिक वोक्कालिगा और लिंगायत वोटरों के समूह में दलितों को जोड़ने के लिए केंद्रीय नेता मल्लिकार्जुन खड़गे का कद बढ़ाया गया है।  दूसरी ओर, गुजरात में गुटबाजी में उलझे शंकरसिंह वाघेला और भरतसिंह सोलंकी के पर कतरने के संकेत देते हुए चुनाव तैयारी वाली कमेटी में दलितों और पाटीदारों को ठोस प्रतिनिधित्व दिया गया है। कांग्रेस ने गुजरात विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिए एक कमेटी गठित की है। कांग्रेस के महासचिव और गुजरात के प्रभारी अशोक गहलोत की अगुवाई वाली इस कमेटी में चार लोगों को रखा गया है, जो प्रदेश कांग्रेस के नेता हैं। यह कमेटी राज्य में विधानसभा चुनाव को लेकर हर फैसले लेने के लिए अधिकृत होगी।

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इस कमेटी के गठन से एक ओर गुजरात विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता शंकरसिंह वाघेला तो दूसरी ओर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भरतसिंह सोलंकी के अधिकार सीमित हो गए हैं। दोनों नेता अब न तो संगठन के मामले में कुछ बोल पा रहे हैं, न ही चुनाव की तैयारियों को लेकर। फैसले गहलोत और उनके चार सहयोगी- जीतू पटवारी, वर्षा गायकवाड़, राजी साटव और हर्षवर्द्धन की कमेटी ले रही है। इस कमेटी की तैयारियों के अनुरूप गुजरात के पाटीदारों को साथ लेने में कांग्रेस पार्टी जुटी है। मेहसाणा से पाटीदार समुदाय के एक किसान की मौत के मुद्दे को लेकर कांग्रेस पार्टी सक्रिय है। कमेटी के पांचों नेताओं के साथ गहलोत, वाघेला और सोलंकी के प्रतिनिधिमंडल ने गुजरात के राज्यपाल से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। फिलहाल, अशोक गहलोत और उनकी टीम गुजरात में पाटीदार, जनजाति और दलित समुदायों के नेताओं से अलग-अलग मुलाकात कर रही है। गुजरात में पाटीदारों को भाजपा समर्थक माना जाता है, लेकिन आरक्षण की मांग को लेकर वे लोग इन दिनों भड़के हुए हैं।

गुजरात की तरह ही कांग्रेस कर्नाटक में योजनाएं तैयार कर रही है। कर्नाटक में लिंगायत और वोक्कालिगा समुदायों को कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक माना जाता है, जो राज्य की आबादी का 30 फीसद हिस्सा हैं। अब कांग्रेस इसमें दलितों को भी जोड़ना चाहती है, जो 24 फीसद की आबादी वाले हैं। दलित कुरुबा समुदाय से आने वाले मुख्य मंत्री सिद्दारमैया के साथ ही केंद्र में मंत्री रहे और अब लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को भी राज्य में सक्रिय किया जा रहा है। प्रदेश कांग्रेस का हाल में जिस तरह से पुनर्गठन किया गया है, उसमें तमाम समीकरणों का ध्यान रखा गया है। सिद्दरमैया ने आलाकमान के सामने लिंगायत एसआर पाटिल को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाने की सिफारिश की। कर्नाटक के दक्षिण में दिनेश गुंडू राव (ब्राह्मण) को सक्रिय किया गया है।

 

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