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VIDEO: नाराज भीड़ से जान बचाकर भागे BJP MLA, दलित कार्यकर्ता की मौत के बाद परिवार से गये थे मिलने

जब कर्षण सोलंकी ने भानुभाई के परिवार वालों से मुलाकात करने की कोशिश की तो प्रदर्शन कर रहे लोग काफी गुस्से में आ गये। दरअसल भानुभाई के साथ प्रदर्शन कर रहे लोग गुजरात सरकार से अपनी मांगों को लेकर हंगामा कर रहे थे।

Bhanubhai Vankar, Dalit acivist, Karsan Solanki, bjp mla Karsan Solanki, BJP Legislator Karsan Solanki, Gujarat, BJP MLA, Gandhinagar Civil Hospital, Hindi news, gujarat news, news in Hindi, Jansattaदलित कार्यकर्ता की मौत के बाद उसके परिवार से मिलने गये भानुभाई वानकर को जबर्दस्त गुस्से का सामना करना पड़ा।

गुजरात में दलित कार्यकर्ता भानुभाई वानकर की मौत के बाद उनके परिवार वालों से मिलने गये बीजेपी विधायक को लोगों को जबर्दस्त गुस्से का सामना करना पड़ा। आत्मदाह कर चुके दलित कार्यकर्ता भानुभाई वानकर से मुलाकात के लिए बीजेपी विधायक कर्षण सोलंकी गांधीनगर के सिविल अस्पताल गये थे। अस्पताल के बाहर कई लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। जब कर्षण सोलंकी ने भानुभाई के परिवार वालों से मुलाकात करने की कोशिश की तो प्रदर्शन कर रहे लोग काफी गुस्से में आ गये। दरअसल भानुभाई के साथ प्रदर्शन कर रहे लोग गुजरात सरकार से अपनी मांगों को लेकर हंगामा कर रहे थे। इसी दौरान बीजेपी विधायक उनके मिलने पहुंचे। लोगों को गुस्से को देखते हुए उन्हें वहां से दौड़कर भागना पड़ा। टीवी-9 द्वारा पोस्ट किये गये एक वीडियो में एक शख्स विधायक पर हाथ चलाता हुआ भी दिख रहा है।इधर गुजरात सरकार ने आत्मदाह कर चुके दलित कार्यकर्ता भानुभाई वानकर के परिवार वालों की मांगें शनिवार को स्वीकार कर लीं। वानकर ने बृहस्पतिवार को आत्मदाह किया था। इससे पहले वानकर के परिजन ने आज उसका शव लेने से इंकार करते हुए कहा था कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, वह शव नहीं लेंगे।

भानुभाई वानकर का शव गांधीनगर सिविल अस्पताल में पोस्टमार्टम कराने के लिए लाया गया था। परिवार की मांग के समर्थन में बड़ी संख्या में दलित प्रदर्शनकारी अस्पताल के बाहर मौजूद थे। वानकर ने बृहस्पतिवार को पाटन कलेक्टर कार्यालय के बाहर खुद को आग लगा ली थी। अगले दिन अहमदाबाद के एक निजी अस्पताल में उसकी मौत हो गई। वह एक भूमिहीन दलित खेतिहर मजदूर हेमाबेन वानकर के लिए लड़ रहा था। हेमाबेन ने आरोप लगाया था कि अधिकारियों ने साल 2013 में उससे 22,236 रूपये तो लिए लेकिन उसे भूखंड नहीं दिया।उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल ने संवाददाताओं को बताया कि भूमि परिवार के सदस्य के नाम स्थानांतरित कर दी जाएगी। पटेल ने कहा ‘‘हम उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अगुवाई में एक न्यायिक आयोग बनाएंगे या एक जांच दल बनाएंगे जो कि जांच करेगा। यह कदम परिवार के फैसले का हिस्सा होगा। दोषियों के खिलाफ हम कड़ी कार्रवाई करेंगे।’’ उन्होंने यह भी कहा ‘‘परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी।, परिवार को अजा अजजा (अत्याचारों की रोकथाम) कानून के तहत आठ लाख रूपये दिए जाएंगे। इसमें से चार लाख रूपये तत्काल दे दिए जाएंगे।’’ एक सप्ताह पहले कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में हेमाबेन और वानकर ने आत्मदाह की धमकी दी थी।

दलित नेता और निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवानी तथा विपक्ष के नेता परेश धनानी ने वानकर के रिश्तेदारों से अस्पताल में मुलाकात की। वानकर मेवानीज राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच से संबद्ध था। संवाददाताओं से बातचीत में मेवानी ने मांग की थी कि एक विशेष जांच दल गठित कर वानकर की मौत के मामले की जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी मांग की थी कि विशेष जांच दल में एक सदस्य दलित समुदाय का होना चाहिए। विशेष जांच दल मामले की जांच के साथ साथ यह भी जांच करेगा कि भूमि क्या फिर से अनुदान में दी जा सकती है। राज्य भर में दलितों को भूमि आवंटित की गई है लेकिन उनके स्वामित्व संबंधी टाइटल नियमित नहीं किए गए हैं।

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