ताज़ा खबर
 

भाजपा समर्थक इन दो कांग्रेसी विधायकों का अहमद पटेल की जीत में रहा सबसे बड़ा रोल

चार भाइयों में तीसरे नंबर पर आने वाले भोला गोहिल ने उस दिन से ही पार्टी आलाकमान से संपर्क तोड़ लिया था जिस दिन शंकर सिंह बाघेला ने कांग्रेस को अलविदा कहा था।
अहमद पटेल की जीत में कांग्रेस के दो बागी विधायकों का बड़ा रोल रहा है।

कांग्रेस के ‘चाणक्य’ अहमद शाह पटेल गुजरात से राज्यसभा के लिए निर्वाचित घोषित हुए हैं। इनकी जीत में कांग्रेस से बगावत कर बीजेपी कैंडिडेट को वोट डालने वाले दो विधायकों का बड़ा रोल रहा है। ये विधायक हैं जसदान से एमएलए भोला गोहिल (42) और जामनगर ग्रामीण विधायक से राघव जी पटेल (58)। चुनाव आयोग ने इन दोनों विधायकों के वोट को अवैध करार दे दिया। लेकिन कांग्रेस के इन दोनों बागियों की पार्टी में उदय की दिलचस्प कहानी है। राघवजी पटेल जो लउवा पाटीदार समुदाय से आते हैं, उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1978 में धारोल से बतौर तालुका अध्यक्ष की थी, जबकि साल भोला गोहिल ने 2000 में जसदान में तालुका पंचायत का चुनाव जीता था। कोली समुदाय से आने वाले भोला गोहिल ग्रामीण अध्ययन में बैचलर की डिग्री रखते हैं । चार भाइयों में तीसरे नंबर पर आने वाले भोला गोहिल ने उस दिन से ही पार्टी आलाकमान से संपर्क तोड़ लिया था जिस दिन शंकर सिंह बाघेला ने कांग्रेस को अलविदा कहा था।

करीब एक महीने पहले भोला गोहिल ने घोषणा की थी वे इस बार विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ेंगे, और उन्हें खुशी होगी यदि उनके मेंटर और कोली समुदाय के बड़े नेता और पूर्व सांसद कुंवर जी बावलिया फिर से चुनाव लड़ें। हालांकि कांग्रेस और बावलिया ने उनके बयान को ज्यादा तवज्जो नहीं दी। इसके बाद जब शंकर सिंह बाघेला ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया और ये चर्चा होने लगी कि सौराष्ट्र इलाके से कांग्रेस के 10 और एमएलए पाला बदलकर बीजेपी में जा सकते हैं तो भोला गोहिल समेत 10 विधायकों को राजकोट में कांग्रेस विधायक के एक रिजोर्ट में रखा गया। लेकिन गोहिल इस रिजॉर्ट से किसी तरह बाहर निकल गये और अंडरग्राउंड हो गये। इसके बाद पार्टी नेतृत्व से इनका संपर्क नहीं रहा। बता दें कि मंगलवार को कांग्रेस के आठ विधायकों ने अहमद पटेल के खिलाफ वोटिंग की थी। इनमें से 6 पहले ही कांग्रेस छोड़ चुके थे।


राघव जी पटेल पांच बार विधायक रह चुके हैं। इनमें से 2 बार उन्हें बीजेपी के टिकट पर जीत मिली है, जबकि 2 बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते हैं। राघव जी पटेल ने 1989 में बीजेपी ज्वाइन की थी और 1995 में इन्होंने शंकर सिंह वाघेला के साथ पार्टी छोड़ दी। उन्होंने बीजेपी छोड़ने की वजह बताते हुए कहा था कि काबिल और वरिष्ठ होने के बाद भी उन्होंने मंत्री नहीं बनाया गया। राघव जी पटेल मानते हैं कि इस बार के विधानसभा चुनाव में पाटीदार पास पलट सकते हैं। लेकिन राघव जी पटेल की नाराजगी इस बात को लेकर है कि कांग्रेस इनके गुस्से को ठीक से फायदा नहीं ले सकी। राघव जी पटेल पिछले साल तीन बार अहमद पटेल से मिले और कांग्रेस में जबर्दस्त बदलाव की पैरवी की और खुद को गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष के रुप में प्रोजेक्ट किया, लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिली।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.