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अमित शाह ने अदालत को बताया दंगे वाली सुबह विधानसभा और अस्पताल में थीं कोडनानी

दंगा मामलों में आरोपी कोडनानी के अनुरोध पर शाह बचाव पक्ष के गवाह के रूप में अदालत में उपस्थित हुए। कोडनानी पर हत्या और दंगा करवाने सहित विभिन्न आरोपों में मुकदमा चल रहा है।

Author अमदाबाद | September 19, 2017 2:58 AM
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह। (photo source Oinam Anand)

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने सोमवार को विशेष एसआइटी अदालत को बताया कि 28 फरवरी, 2002 को नरौदा गाम में हुए दंगे की सुबह वह गुजरात की पूर्व मंत्री माया कोडनानी से प्रदेश विधानसभा और बाद में अस्पताल में भी मिले थे। दंगा मामलों में आरोपी कोडनानी के अनुरोध पर शाह बचाव पक्ष के गवाह के रूप में अदालत में उपस्थित हुए। कोडनानी पर हत्या और दंगा करवाने सहित विभिन्न आरोपों में मुकदमा चल रहा है। शाह ने न्यायाधीश पीबी देसाई की अदालत को बताया कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि सदर अस्पताल से पुलिस द्वारा सुरक्षित बाहर निकाले जाने के बाद माया कोडनानी कहां गईं। पुलिस उन्हें और माया कोडनानी को सुरक्षित स्थान पर ले गई थी क्योंकि गुस्साई भीड़ ने उन्हें अस्पताल में घेर लिया था।

गोधरा ट्रेन अग्निकांड के एक दिन बाद 28 फरवरी, 2002 को नरौदा गाम में 11 मुसलमानों की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में कुल 82 लोगों के खिलाफ सुनवाई हो रही है। 2002 में शाह और कोडनानी दोनों ही भाजपा विधायक थे। कोडनानी ने अदालत से अनुरोध किया था कि वह शाह को बचाव पक्ष के गवाह के रूप में समन करें ताकि उनके इस बयान की पुष्टि हो सके कि वह दंगे वाले दिन पहले विधानसभा और बाद में सोला सदर अस्पताल में थीं और नरौदा गाम में मौजूद नहीं थीं। शाह ने अदालत से कहा कि 28 फरवरी, 2002 को वह विधानसभा सत्र में भाग लेने के लिए वहां गए थे। सत्र सुबह साढ़े आठ बजे शुरू हुआ था और कोडनानी सदन में थीं। उन्होंने कहा कि विधानसभा में साबरमती एक्सप्रेस के डिब्बे बाकी एस-6 को जलाने की घटना की कठोरतम शब्दों में निंदा की गई थी। एक दिन पहले हुई इस घटना में 59 कारसेवक जलकर मर गए थे। शाह ने कहा कि यह सूचना मिलने पर कि कारसेवकों के शव अस्पताल लाए गए हैं, वह सोला सदर अस्पताल गए। शवों की अटॉप्सी वहीं हुई। उन्होंने कहा- चूंकि सोला सदर अस्पताल मेरे विधानसभा क्षेत्र में आता है, मैं सुबह साढ़े नौ से पौने दस बजे के बीच वहां पहुंचा। उन्होंने कहा कि माया कोडनानी हमसे सोला सदर अस्पताल में मिलीं। शाह ने कहा कि भीड़ कारसेवकों की हत्या से गुस्से में थी और उन्होंने अस्पताल को घेर लिया था।

उन्होंने कहा कि पुलिस मायाबेन को अस्पताल से बाहर सुरक्षित निकाल रही थी, जब सवा 11 से साढ़े 11 के बीच मैंने पहली बार उन्हें देखा। उन्होंने मायाबेन के साथ ही मुझे भी अपने वाहन में कुछ दूर तक सुरक्षित बाहर छोड़ा और मुझे गोटा क्रॉस रोड पर छोड़ा लेकिन वह अभी भी वाहन (जीप) में थीं। उसके बाद मैं अपने घर चला गया और मुझे नहीं मालूम कि वह कहां गई। कोडनानी को तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में 2007 में कनिष्ठ मंत्री बनाया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने तीन हफ्ते पहले विशेष एसआइटी अदालत से कहा कि वह मामले की सुनवाई चार महीने के भीतर पूरी करे। तत्कालीन प्रधान न्यायमूर्ति जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली पीठ ने निचली अदालत से कहा कि वह दो महीने के भीतर गवाहों का बयान दर्ज करने का काम पूरा करे। नरौदा गाम मामला 2002 में हुए नौ बड़े सांप्रदायिक दंगों में से एक है जिनकी जांच सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त विशेष जांच दल ने की है। कोडनानी को नरौदा पाटिया दंगा मामले में दोषी करार देते हुए 28 साल कैद की सजा सुनाई गई है।

 

 

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