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नोटबंदी से गुजरात के आदिवासी दुग्ध उत्पादक और किसानों पर बुरा असर

जिला सहकारी बैंकोंं पर भारतीय रिजर्व बैंक की 500 और 1000 रुपए के पुराने नोटों को बदलने की पाबंदी के चलते गुजरात के छोटा उदयपुर जिले के आदिवासी दुग्ध उत्पादक और किसान बहुत बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।

जिला सहकारी बैंकोंं पर भारतीय रिजर्व बैंक की 500 और 1000 रुपए के पुराने नोटों को बदलने की पाबंदी के चलते गुजरात के छोटा उदयपुर जिले के आदिवासी दुग्ध उत्पादक और किसान बहुत बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। ये आदिवासी बाजार से अपनी रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुएं भी नहीं खरीद पा रहे हैं क्योंकि उन्हें उनकी ग्राम स्तरीय सहकारी दुग्ध संस्था से नकदी मिलना बंद हो गई है। बड़ौदा दुग्ध डेयरी (बड़ौदा डेयरी दुग्ध उत्पादक सहकारी सोसायटी) के निदेशक मंडल के एक निदेशक संग्राम सिंह राठवा ने पीटीआई-भाषा से कहा कि उन्होंने डेयरी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक से इस मामले को केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक के सामने उठाने को कहा है ताकि आदिवासियों को तत्काल उनका भुगतान किया जा सके।

उन्होंने कहा कि बड़ौदा दुग्ध डेयरी हर रोज छोट उदयपुर जिले में 450 ग्राम स्तरीय दुग्ध उत्पादक सहकारी सोसायटियों से ढाई लाख लीटर दूध का संग्रहण करती है। इसमें कुल 45,000 आदिवासी दुग्ध उत्पादक एवं किसान सदस्य हैं। राठवा ने कहा कि डेयरी इन सहकारी सोसायटियों के खाते में पहले ही 14 करोड़ रुपए जमा करा चुकी है।

यह रकम छोटा उदयपुर जिले में बड़ौदा जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों की तीन शाखाओं में जमा करायी गई है ताकि इन सदस्य किसानों को भुगतान किया जा सके जो गरीब आदिवासी समुदायों से संबद्ध हैं। आदिवासियों के इन बैंक शाखाओं में बचत खाते नहीं हैं। इसकी वजह से वे बैंकों से नकदी निकासी नहीं कर सकते।

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