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गुजरात: पति के खाते का स्‍टेटमेंट पत्‍नी को दे दिया, बैंक पर लगा 10 हजार रुपये जुर्माना

गुजरात में इंडियन ओवरसीज बैंक को अपने एक खाता धारक की अकाउंट स्टेटमेंट उसकी पत्नी को देना भारी पड़ गया। बैंक पर इस लापरवारी के लिए 10 हजार रुपये का जुर्माना लगा है।

प्रतीकात्मक फोटो (फाइल)

गुजरात में इंडियन ओवरसीज बैंक को अपने एक खाता धारक की अकाउंट स्टेटमेंट उसकी पत्नी को देना भारी पड़ गया। बैंक पर इस लापरवारी के लिए 10 हजार रुपये का जुर्माना लगा है। बैंक ने तीन साल की स्टेटमेंट शख्स की पत्नी को दे दी थी। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, अहमदाबाद डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर रिड्रेसल फोरम ने गुरुवार को इंडियन ओवरसीज बैंक की सरदारनगर-हंसोल ब्रांच को खाता धारक को 10 हजार रुपये भरने को कहा। खाता धारक दिनेश पमननी की इजाजत के बिना बैंक द्वारा पर्सनल डिटेल्स उसकी पत्नी को दिए जाने के बाद दिनेश ने बैंक पर मुकदमा दायर कर दिया था। कोर्ट में दिनेश ने कहा कि उसका अपनी पत्नी से वैवाहिक विवाद है और मामला फैमिली कोर्ट में चल रहा है। ऐसे में उनकी पत्नी स्टेटमेंट का इस्तेमाल फायदा लेने के लिए कर सकती है।

दिनेश को अपने मोबाइल फोन पर बैंक खाते से 103 रुपये कटने का मैसेज मिला था। पैसे किस वजह से काटे गए थे इसकी जांच करने पर पता लगा कि बैंक ने तीन साल की अकाउंट स्टेटमेंट देने के एवज में यह रकम काटी है। दिनेश की पत्नी का नाम हर्षिका है। बैंक के ऐसा करने पर दिनेश ने आपत्ति दर्ज कराई। उसने दावा किया कि उसने अपनी पत्नी को कोई भी ट्रांस्कैशन करने का कोई अधिकार नहीं दिया है। इसके बाद दिनेश ने बैंक के खिलाफ कंज्यूमर कोर्ट में मुकदमा दायर कर दिया। वहीं बैंक का कहना था कि उसने स्टेंटमेंट सिर्फ इसलिए दे दी ताकि वह अपने ग्राहक को अच्छी सर्विस दे सके।

दिनेश के वकील सीए मोदी ने कहा कि बैंक बिना इजाजत स्टेटमेंट किसी तीसरी पार्टी को नहीं दे सकता है। बैंक के ऐसा करने से क्लाइंट की प्राइवेसी ब्रीच हुई है। वकील ने यह भी कहा कि दिनेश की पत्नी स्टेटमेंट फैमिली कोर्ट में भी दे सकती है जिससे मेरे क्लाइंट का नुकसान हो सकता है। सुनवाई के बाद कोर्ट ने रिजर्व बैंक द्वारा तय किए गए नियमों का हवाला देते हुए कहा कि बैंक को बिना खाता धारक की इजाजत के तीसरी पार्टी को स्टेटमेंट नहीं देनी चाहिए थी। उसकी पत्नी के पास डिटेल्स लेने का अधिकार नहीं था।

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