गुजरात हाई कोर्ट ने जेल में बंद आम आदमी पार्टी के विधायक चैतर वसावा को तीन दिवसीय मानसून सत्र में हिस्सा लेने के लिए सात दिन की अस्थायी जमानत दे दी है।
चैतर वसावा इस समय वडोदरा सेंट्रल जेल में बंद हैं। उन्हें नर्मदा जिला के सत्र न्यायालय द्वारा आपराधिक हमले और जबरन वसूली का मामला में सात साल की सजा सुनाई गई है।
न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात हाई कोर्ट के जस्टिस विमल के व्यास ने सोमवार को उनकी याचिका स्वीकार की और फिर इस पर सुनवाई करते हुए उन्हें सात दिन की जमानत दे दी।
गुजरात हाई कोर्ट की शर्तों के अनुसार, इस अवधि के दौरान आम आदमी पार्टी के विधायक चैतर वसावा न तो गांधीनगर छोड़ सकेंगे और न ही मीडिया और न किसी सभा को संबोधित कर सकेंगे।
गुजरात सरकार ने किया याचिका का विरोध
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात सरकार ने चैतर वसावा की याचिका का विरोध किया। राज्य सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए तर्क दिया कि काफी समय पहले मौका दिए जाने के बावजूद, उन्होंने विधानसभा के लिए कोई सवाल पेश नहीं किया, इसलिए अदालत को इस याचिका पर विचार नहीं करना चाहिए।
गुजरात सरकार ने कहा कि अगर हाई कोर्ट उसकी याचिका पर विचार करता भी है, तो यह तीन दिन से ज़्यादा के लिए नहीं होना चाहिए और इसके साथ उचित शर्तें भी होनी चाहिए, जैसे कि वह मीडिया से बात न करे, राजनीतिक सभाओं में हिस्सा न ले और गांधीनगर न छोड़े।
वसावा के वकील ने की थी 15 दिन की जमानत की मांग
चैतर वसावा के वकील ने 15 दिन की अस्थायी जमानत का अनुरोध किया था। कोर्ट ने कहा कि अगर वसावा को विधानसभा सत्र में शामिल होने के लिए राज्य द्वारा आमंत्रित किया गया है और वह स्वीकार्य रूप से एक विधायक के रूप में अयोग्य नहीं हैं, तो राज्य उनकी याचिका का विरोध कैसे कर सकता है।
जेल में क्यों है चैतर वसावा?
नर्मदा जिले के राजपीपला की एक सत्र अदालत ने 23 जून को सरकारी वन भूमि पर अवैध खेती के खिलाफ कार्रवाई के बाद वन अधिकारियों पर हमला करने और उनसे 60,000 रुपये की वसूली करने के मामले में वसावा, उनकी पत्नी, निजी सहायक और छह अन्य को सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। वे वन अधिकारियों पर हमले, उन्हें डराने-धमकाने और उनसे वसूली में शामिल पाए गए थे।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, वन अधिकारियों ने एक मामला दर्ज करने के बाद अनधिकृत फसलों को हटा दिया था, जिसके बाद अधिकारियों को चैतर वसावा के आवास पर बुलाया गया था।
अभियोजन ने कहा कि वहां एक वन अधिकारी के साथ दुर्व्यवहार किया गया, विधायक द्वारा उसे थप्पड़ मारा गया और धमकी दी गई, जबकि दहशत पैदा करने के लिए हवा में कथित तौर पर गोली चलाई गई थी। अभियोजन पक्ष ने बताया कि अगले दिन वन अधिकारियों को कथित तौर पर 60,000 रुपये देने के लिए मजबूर किया गया था।
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यह मामला गुजरात की भरूच लोकसभा सीट से लोकसभा चुनाव लड़ चुके चैतर वसावा से जुड़ा है। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।
