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गुजरात हाईकोर्ट की चेतावनी: गंभीर घटनाओं पर ध्यान दे राज्य सरकार वरना मुश्किल होगी, सवाल पूछने वालों को नहीं कर सकते तड़ीपार

गुजरात हाई कोर्ट ने CAA के विरोध प्रदर्शन के आयोजक के खिलाफ पुलिस के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि सरकार सवाल पूछने वाले नागरिकों को तड़ीपार नहीं कर सकती है।

गुजरात हाईकोर्ट की चेतावनी: गंभीर घटनाओं पर ध्यान दे राज्य सरकार वरना मुश्किल होगी, सवाल पूछने वालों को नहीं कर सकते तड़ीपार
सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वाले को तड़ीपार नहीं कर सकते हैं: गुजरात हाईकोर्ट । Photo Source- Indian Express

गुजरात हाई कोर्ट ने CAA के विरोध प्रदर्शन के आयोजक के खिलाफ पुलिस के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि सरकार सवाल पूछने वाले नागरिकों को तड़ीपार नहीं कर सकती है। गुजरात उच्च न्यायलय ने राज्य सरकार को गंभीर घटनाओं पर ध्यान देने के लिए भी कहा, आदेश के अनुसार सरकार को इन घटनाओं की तरफ ध्यान देना चाहिए वरना मुश्किल हो जाएगी। जस्टिस परेश उपाध्याय ने यह टिप्पणी अहमदाबाद पुलिस द्वारा 39 वर्षीय एक्टिविस्ट कलीम सिद्दीकी के खिलाफ तड़ीपार के आदेश को बर्खास्त करते हुए दी।

पिछले साल नवंबर में जारी आदेश के अनुसार पुलिस ने सिद्दीकी को एक साल के लिए अहमदाबाद, गांधीनगर, खेड़ा और मेहसाणा जिलों में दाखिल होने से रोक लगा दी थी। सिद्दीकी ने इस आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसके बाद कोर्ट ने पुलिस के आदेश पर मार्च महीने में रोक लगा दी थी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दिल्ली के शाहीन बाग में CAA-NRC के खिलाफ चल रहे आंदोलन को देखते हुए सिद्दीकी ने भी अपने साथियों के साथ मिलकर राखियाल इलाके में धरना-प्रदर्शन किया था।

प्रदर्शन के बाद पुलिस द्वारा गैरकानूनी तौर पर बुलाई गई मीटिंग के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी। पुलिस द्वारा यह दावा किया गया कि सिद्दीकी इस भीड़ का हिस्सा था। हाई कोर्ट के अनुसार, सिद्दीकी के खिलाफ कार्रवाई के पीछे दो शिकायतों को आधार बनाया गया था। दूसरी FIR भी इसी मामले से जुड़ी थी। जिसमें कहा गया कि कुछ अज्ञात लोगों द्वारा सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किए जा रहे थे, शिकायत के अनुसार याचिका कर्ता इस भीड़ में मौजूद था।

हाई कोर्ट ने पुलिस की इस कार्रवाई पर नाराजगी दर्ज कराते हुए कहा कि किसी भी नागरिक को इसलिए सजा नहीं दी जा सकती है क्योंकि वह सरकार का विरोध कर रहा है। याचिकाकर्ता को राहत देते हुए कोर्ट ने देखा कि जिन दो मामलों में सिद्दीकी को तड़ीपार किया गया था, उनमें से एक में तो वह पहले ही बरी हो चुका है।

जस्टिस परेश उपाध्याय ने तड़ीपार किए गए 30 आदेशों के केस में तीन जिम्मेदार अधिकारियों पर 10-10 हजार रुपए का जुर्माना लगाने का भी आदेश दिया। साथ ही पुलिस और जिला मजिस्ट्रेट के खिलाफ भी कार्रवाई की बात कहीं, क्योंकि उनके द्वारा लोगों पर बेतरतीब ढंग से ‘पासा’ लागाकर गिरफ्तार किया गया या तड़ीपार का आदेश दिया गया।

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हाईकोर्ट ने जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस से पूछा कि आप किस आधार पर एक नागरिक को राज्य के 11 जिलों में दाखिल नहीं होने का आदेश दे सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि यह अधिकार आप लोगों को किसने दिया, जिसनें इस तरह के आदेश पारित किए हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

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