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2016 में गुजरात के दलितों पर हुआ 16 सालों में सबसे ज्‍यादा जुल्‍म, रेप और कत्‍ल का भी टूटा रिकॉर्ड

साल 2016 में गुजरात में रिकॉर्ड 32 दलितों की हत्या हुई, जबकि 80 दलित महिलाओं के साथ रेप की घटना दर्ज की गई।

गुजरात में साल 2016 में दलितों पर सबसे ज्यादा हत्या की वारदाते हुई। (photo source- AP)

साल 2016 गुजरात के दलितों के लिए कहर बनकर आया। पिछले साल 11 जुलाई को ऊना में गोहत्या के आरोप में दलितों को अर्द्धनग्न कर पीटा गया था। इसके बाद देश में दलित विमर्श पर जमकर हंगामा हुआ था और गुजरात की तत्कालीन आनंदीबेन पटेल सरकार को काफी आलोचना सहनी पड़ी था। हालांकि इस घटना के पीड़ित दलितों का कहना था कि वे मरी हुई गाय की चमड़ी निकाल रहे थे। लेकिन देश भर में हुए हंगामे के बावजूद दलितों पर जुर्म की घटनाएं नहीं रुकी। और साल 2016 ने दलितों पर जुर्म, रेप और हत्या की वारदातों में पिछले 16 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। टाइम्स ऑफ इंडिया को एक आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक साल 2016 में गुजरात में दलितों के ख़िलाफ़ कुल 1,355 मामले दर्ज किये गये। ये आंकड़ा 2001 के बाद सबसे ज्यादा है। 2001 के बाद 2016 में दलितों की सबसे ज्यादा हत्या भी हुई और दलित महिलाओं के साथ रेप की सबसे ज्यादा घटनाएं भी रिकॉर्ड की गई।

RTI एक्टिविस्ट कौशिक मंजुलबेन बाबूभाई ने गुजरात डीजीपी ने हासिल आंकड़ों के आधार पर बताया कि 2016 में दलितों के साथ रोज़ाना अत्याचार की लगभग 4 घटनाएं दर्ज की गई। 2016 में गुजरात में रिकॉर्ड 32 दलितों की हत्या हुई, जबकि 80 दलित महिलाओं के साथ रेप की घटना दर्ज की गई। 2001 में दलित महिलाओं के साथ रेप की मात्र 9 घटना ही पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज की गई थी। हत्या और रेप के अलावा गुजरात में दलितों पर गंभीर रुप से हमले के 88 केस दर्ज किये गये, जबकि लूट की 12 FIR दर्ज की गई।

आपको बता दें कि 2001 में दलितों पर अत्याचार की 1,034 घटनाएं रिकॉर्ड की गई थी। 2016 से पहले 2008 दलितों के लिए सबसे खराब साल रहा जब उनपर जुर्म की 1,165 घटनाएं दर्ज की गई। दुखद ये है कि 2017 में भी गुजरात में दलितों पर हिंसा की शुरुआत हो गई है। इस साल 28 फरवरी को अमरेली में एक दलित सरपंच जयसुख माधड़ की हत्या कर दी गई ।

RTI एक्टिविस्ट कौशिक मंजुलबेन बाबूभाई के मुताबिक ये आकंड़े राज्य के 33 ज़िलों के 40 पुलिस दफ़्तर से लिये गये हैं। इन आंकड़ों के सार्वजनिक होने के बाद राज्य की बीजेपी सरकार को एकबार फिर से विपक्ष का हमला झेलना पड़ सकता है।

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