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‘एक भी सीट हारी बीजेपी तो कर दूंगा रिजाइन’, पहले गैर गुजराती भाजपा अध्यक्ष का दावा, जानें- कौन हैं चंद्रकांत पाटिल?

सीआर पाटिल जाति की राजनीति को पूरी तरह से नकारते हैं और कहते हैं कि अगर ऐसा होता तो उन्हें गुजरात भाजपा का अध्यक्ष नियुक्त नहीं किया जाता।

Author , Translated By नितिन गौतम अहमदाबाद | Updated: September 4, 2020 1:11 PM
CR PATIL GUJARAT BJP STATE PRESIDENTगुजरात बीजेपी के अध्यक्ष सीआर पाटिल पार्टी के पहले गैर-गुजराती प्रदेश अध्यक्ष हैं। (फाइल)

गुजरात भाजपा अध्यक्ष सीआर पाटिल का दावा है कि उनकी पार्टी गुजरात विधानसभा चुनाव में सभी 182 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल करेगी। पाटिल ने ये भी कहा कि यदि उनकी पार्टी एक भी सीट पर हारी तो वह उसी दिन गुजरात भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे देंगे। सीआर पाटिल ने कहा कि मेरी कोशिश होगी कि किसी भी कांग्रेस नेता को पार्टी में शामिल नहीं किया जाए। द इंडियन एक्सप्रेस के साथ बातचीत में सीआर पाटिल ने बताया कि हम किसी कांग्रेस नेता को किसी भी सीट पर जीतने ही नहीं देंगे, क्योंकि यदि कई कांग्रेस विधायक जीत जाता है तभी उसे भाजपा में शामिल करने की संभावना होती है।

बता दें कि चंद्रकांत रघुनाथ पाटिल (65 वर्ष) भाजपा के पहले गैर-गुजराती प्रदेश अध्यक्ष हैं। यही वजह है कि सीआर पाटिल को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने से कई लोगों को हैरानी भी हुई है। पाटिल ने बताया कि जब गुजरात और महाराष्ट्र एक ही राज्य थे, तब उनके पिता रघुनाथ पाटिल पुलिस फोर्स में थे। पाटिल का जन्म सूरत में हुआ और पिता की तरह वह भी पुलिस फोर्स में शामिल हुए और 15 साल तक सेवा में रहे।

8 दिसंबर 1989 को सीआर पाटिल ने पुलिस सेवा से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो गए। पाटिल ने बताया कि नरेंद्र गांधी नाम के एक कोरपोरेटर ने उन्हें भाजपा में शामिल कराया था। पाटिल सूरत भाजपा में 6 साल तक कोषाध्यक्ष पद पर रहे और फिर सूरत यूनिट के उपाध्यक्ष भी चुने गए। साल 1995 में गुजरात में केशुभाई पटेल की सरकार में GIDC (गुजरात इंड्सट्रियल डेवलेपमेंट कॉरपोरेशन) के चेयरमैन भी नियुक्त किए गए।

पाटिल ने साल 2009 मे पहला लोकसभा चुनाव लड़ा था उसके बाद से अभी तक सांसद हैं। सीआर पाटिल जाति की राजनीति को पूरी तरह से नकारते हैं और कहते हैं कि अगर ऐसा होता तो उन्हें गुजरात भाजपा का अध्यक्ष नियुक्त नहीं किया जाता। पाटिल को पीएम मोदी का करीबी माना जाता है। गुजरात के सभी विधानसभा सीटों पर जीत हासिल करने के दावे पर कहते हैं कि अगर हम दो बार राज्य की 26 में से 26 लोकसभा सीटें जीत सकते हैं तो फिर विधानसभा चुनाव में ऐसा क्यों नहीं कर सकते?

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