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मुनाफाखोरी-रोधी प्राधिकरण को मंजूरी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था के तहत राष्ट्रीय मुनाफाखोरी-रोधी प्राधिकरण के गठन को मंजूरी दे दी है।

Author नई दिल्ली | November 17, 2017 1:33 AM

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था के तहत राष्ट्रीय मुनाफाखोरी-रोधी प्राधिकरण के गठन को मंजूरी दे दी है। इस प्राधिकरण के गठन के पीछे मकसद नई अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था में घटी दरों का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाना है। केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद कहा कि अब सिर्फ 50 ऐसी वस्तुएं जीएसटी की 28 फीसद के ऊंचे कर स्लैब में रह गई हैं। वहीं कई वस्तुओं पर कर की दर को घटाकर पांच फीसद किया गया है।

प्रसाद ने कहा कि राष्ट्रीय मुनाफारोधी प्राधिकरण देश के उपभोक्ताओं के लिए एक विश्वास है। यदि किसी ग्राहक को लगता है कि उसे घटी कर दर का लाभ नहीं मिल रहा है तो वह प्राधिकरण में इसकी शिकायत कर सकता है। मंत्री ने कहा कि यह सरकार की इस बारे में पूर्ण प्रतिबद्धता को दर्शाता है कि वह जीएसटी के क्रियान्वयन का पूरा लाभ आम आदमी तक पहुंचाना चाहती है। परिषद ने इससे पहले पांच सदस्यीय राष्ट्रीय मुनाफाखोरी-रोधी प्राधिकरण के गठन को मंजूरी दी थी। कैबिनेट सचिव पीके सिन्हा की अगुआई वाली एक समिति प्राधिकरण के चेयरमैन और सदस्यों का नाम तय करेगी। प्राधिकरण का कार्यकाल चेयरमैन के पद संभालने की तारीख से दो साल का होगा। चेयरमैन और चार सदस्यों की उम्र 62 साल से कम होनी चाहिए।

खुले बाजार में दाल-दलहन की गिरती कीमतों के बीच सरकार ने गुरुवार को सभी तरह की दालों के निर्यात पर लगे प्रतिबंध समाप्त कर दिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंंित्रमंडल की बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए सूचना प्रौद्योगिकी (आइटी) और विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए कहा कि सभी प्रकार के दलहनों का निर्यात खोले जाने से किसानों को उनकी कृषि उपज के लिए लाभकारी दाम मिल सकेंगे। इससे उन्हें बुआई के रकबे को बढ़ाने में प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि किसानों को अपने उत्पादों का विपणन करने के कई तरह के विकल्प प्राप्त हो सकें।

मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) ने खाद्य और सार्वजनिक वितरण सचिव की अगुआई वाली समिति को दलहन निर्यात व आयात नीति की समीक्षा करने के लिए अधिकृत कर दिया। उन्होंने कहा कि दलहनों का निर्यात, दलहनों के अतिरिक्त उत्पादन के लिए एक वैकल्पिक बाजार प्रदान करेगा। इससे देश और निर्यातकों को उनका निर्यात बाजार फिर से हासिल करने में मदद मिलेगी।

इसके अलावा सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मध्य आय वर्ग (एमआइजी) श्रेणी में आने वाले मकानों के कार्पेट एरिया में बढ़ोतरी को भी मंजूरी दे दी। एमआइजी-1 श्रेणी के तहत मकानों के कार्पेट एरिया को 90 वर्ग मीटर से बढ़ा कर 120 वर्ग मीटर किया गया है। वहीं एमआइजी-2 खंड के तहत इस एरिया को वर्तमान के 110 वर्ग मीटर से बढ़ा कर 150 वर्गमीटर किया गया है। एमआइजी-1 श्रेणी के तहत छह लाख और 12 लाख के बीच सालाना कमाई वालों को नौ लाख रुपए तक कर्ज लेने पर ब्याज में चार फीसद की रियायत है। इसी प्रकार एमआइजी-2 श्रेणी के तहत 12 लाख रुपए से 18 लाख रुपए तक की सालाना आय वालों को 12 लाख रुपए तक के कर्ज पर ब्याज में तीन फीसद की छूट है।

मंत्रिमंडल ने समन्वित बाल विकास सेवाएं (आइसीडीएस) योजना के तहत आने वाली कई उप योजनाओं की जारी रहने की अवधि को भी नवंबर 2018 तक बढ़ा दिया है। जिसमें 41,000 करोड़ रुपए से अधिक का परिव्यय होगा। इसके तहत आंगनबाड़ी सेवाओं, किशोरियों से संबंधित योजना, बाल संरक्षण सेवाएं और राष्ट्रीय पालना गृह योजना को एक अप्रैल 2017 से 30 नवंबर 2018 तक जारी रखने की अनुमति दी गई है। ये सब एक विस्तृत योजना आइसीडीएस के तहत आने वालीउप योजनाएं हैं। मंत्रिमंडल ने 11-14 आयु वर्ग की स्कूल में पढ़ाई छोड़ देने वाली किशोरियों के लिए योजना का चरणबद्ध ढंग से विस्तार करने को भी मंजूरी दी है। साथ ही इसी तरह की बच्चियों के लिए वर्तमान किशोरी शक्ति योजना को चरणबद्ध ढंग से बंद करने को भी अनुमति दी गई।

इस निर्णय के तहत राष्ट्रीय पालनागृह योजना को केंद्र द्वारा प्रायोजित योजना में परिवर्तित किया जाएगा। इसमें संशोधित लागत भागीदारी के तहत विधायिका वाले सभी राज्य व केंद्र शासित क्षेत्र के बीच 60:40 की रहेगी। पूर्वोत्तर क्षेत्र, हिमालयी राज्य व विधायिका वाले केंद्र शासित क्षेत्रों में यह भागीदारी 90:10 के आधार पर रहेगी। बिना विधायिका वाले केंद्र शासित प्रदेशों में इसकी 100 फीसद भागीदारी केंद्र करेगा। मौजूदा उप योजनाएं कोई नई योजनाएं नहीं हैं और 12वीं पंचवर्षीय योजना से जारी हैं।

मंत्रिमंडल ने आंगनबाड़ी सेवाओं के लिए 34441.34 करोड़ रुपए, राष्ट्रीय पोषण मिशन (प्रस्तावित) के लिए 4241.33 करोड़ रुपए, किशोरियों की योजना के लिए 1238.37 करोड़ रुपए, शिशु संरक्षण सेवाओं के लिए 1083.33 करोड़ रुपए और राष्ट्रीय पालनागृह योजना के तहत 349.33 करोड़ रुपए के परिव्यय को मंजूरी दी है। एक अन्य फैसले में मंत्रिमंडल ने भारत और बेलारूस के बीच विज्ञान, प्रौद्योगिकी व कृषि क्षेत्रों में आपसी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए हुए वैज्ञानिक व प्रौद्योगिकी सहयोग समझौते को मंजूरी प्रदान कर दी। मंत्रिमंडल ने भारत और पोलैंड के बीच नागर विमानन के क्षेत्र में सहयोग को प्रोत्साहित करने के लिए सहमति पत्र (एमओयू) को भी मंजूरी प्रदान कर दी। इस एमओयू पर दोनों देशों की सरकारों की मंजूरी मिलने के बाद हस्ताक्षर होंगे।

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