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ग्रेटर नोएडा में बनेगा NCR का सबसे बड़ा पार्क

ग्रेटर नोएडा में दिल्ली एनसीआर क्षेत्र के सबसे बड़े ईको पार्क तैयार करने की योजना है। इस इको पार्क को सौ करोड़ की लागत से करीब 26 सौ हेक्टेयर पर बनाने की योजना है।

Author ग्रेटर नोएडा | June 24, 2016 2:27 AM
(Express Photo)

ग्रेटर नोएडा में दिल्ली एनसीआर क्षेत्र के सबसे बड़े ईको पार्क तैयार करने की योजना है। इस इको पार्क को सौ करोड़ की लागत से करीब 26 सौ हेक्टेयर पर बनाने की योजना है। इस पार्क की खास बात ये होगी कि यहां निवास करने वाले किसी भी जीव-जंतु को किसी प्रकार से भी प्रभावित नहीं किया जाएगा। गे्रटर नोएडा विकास प्राधिकरण का कहना है कि इस पार्क में कोई ऐसी गतिविधि नहीं होने दी जाएगी जो पक्षियों और जीव जंतुओं प्राकृतिक आवास और जीवन को किसी प्रकार से भी प्रभावित करे।

ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर क्षेत्र में दादरी मार्ग से सटा करीब 33 सौ हेक्टेयर पर घना जंगल है। प्रदेश सरकार की ओर से लगभग 26 सौ हेक्टेयर पर प्राधिकरण को इंकोपार्क बनाने की अनुमति दी है। साथ ही यह निर्देश भी की यहां के पारिस्थितिक तंत्र को जरा भी प्रभावित न किया जाए। इसके लिए प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव संजीव शरण और प्राधिकरण के सीईओ दीपक अग्रवाल की अगुआई में एक दल फ्रांस भेजा गया था। दरअसल, फ्रांस में दुनिया का सबसे बड़ा ईकोपार्क है।

वहां से लौट कर अग्रवाल ने बताया कि ईकोपार्क, नेचर पार्क व सिटी पार्क समेत करीब दो दर्जन पार्कों का अध्ययन व निरीक्षण किया गया है। ताकि यहां तैयार होने वाले इस इको पार्क में वहां के अनुभवों का समवेश किया जा सके। उन्होंने बताया कि इस बात का पूरी तरह ध्यान रखा जाएगा कि पार्क में मौजूद जीवों के जीवन चक्र किसी प्रकार से प्रभावित न हो। पौधों का रख रखाव, पार्क के अंदर कूड़ा निस्तारण, ड्रेनेज सिस्टम, जल संचय के संसाधनों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। पार्क के साथ ही एक बफर जोन होगा। जहां पार्क आने वालों के खाने पीने और मनोरंजन का इंतजाम किया जाएगा।

इसके लिए पार्क से बिल्कुल बाहर की ओर एक जोन बनाया जाएगा। इससे अंदर रहने वाले जीवों पर मानवीय गतिविधि का असर न पड़े। इस जोन का निर्माण वन विभाग के निर्देश पर प्राधिकरण की ओर से किया जाएगा। पूरी तरह से तैयार होने के बाद यह एनसीआर का यह सबसे बड़ा ईकोपार्क होगा। पार्क के जंगल को और घना करने के लिए फलदार और छायादार वृक्ष लगाए जा रहे हैं। विभाग का कहना है कि कीकर और बबूल के पौधों को हटाए जाने की योजना भी है। हालांकि एनजीटी ने फिलहाल इस पर रोक लगा रखी है। प्राधिकरण एक महीने के अंदर एनजीटी में जबाव दाखिल कर रोक हटवाने का प्रयास करेगा।

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