Greater Noida News उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में प्रशासनिक लापरवाही का एक और मामला सामने आया है, जहां एक 3 साल के मासूम की गड्ढे के पानी में डूबकर दर्दनाक मौत हो गई। महीने भर पहले ही नोएडा में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की भी ऐसे ही गड्ढे में डूबकर मौत हुई थी। इसके चलते सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या प्रशासन ने पुरानी लापरवाही से कोई सबक नहीं लिया?
दरअसल ये मामला ग्रेटर नोएडा के दलेलगढ़ गांव का है। यहां 3 साल का देवांश अपने घर परिजन के साथ धार्मिक अनुष्ठान में आया था। दोपहर में देवांश खेल रहा था और खेलते-खेलते ही वह पास के एक गड्ढे में गिर गया, जो कि 6-7 फीट का था। इस मामले में ग्रामीणों का आरोप है कि पशुचर भूमि पर यह गड्ढा है।
प्राधिकरण ने किया किसान की जमीन होने का दावा
लोगों का कहना है कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से इसकी तारबंदी कराने के लिए शिकायत कई बार की गई थी लेकिन अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की और लापरवाही भी दिखी। दूसरी ओर इसको लेकर प्राधिकरण का दावा है कि यह जमीन किसान की है।
अचानक गायब हो गया था देवांश
एक तरफ सभी लोग आयोजन में व्यस्त थे। देवांश अपनी मां अंजली के साथ आया था। भंडारे के दौरान देवांश अन्य बच्चों के साथ खेलते-खेलते गड्ढे में डूब गया। कुछ देर बाद उसका कोई पता न चलने पर परिजन और रिश्तेदार उसे ढूंढने लगे लेकिन कुछ पता नहीं चला, जिसके चलते पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
जब लोग देवांश को ढूंढ रहे थे तो उस दौरान ही किसी ने समाधि स्थल के निकट गड्ढे में भरे पानी में बच्चे की टोपी देखी। इसके बाद लोग फौरन पानी में उतरे और बच्चे को निकाला। उसे आनन फानन में नजदीकी अस्पताल भी ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
देवांश की मौत से परिजनों में गमगीन परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। दूसरी ओर सवालों के घेरे में एक बार फिर प्रशासन है। आगरा में ‘पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस’ लिखा गुब्बारा मिलने के मामले में एफआईआर दर्ज
