ताज़ा खबर
 

आतंकवादियों की पाकिस्तानी पत्नियों ने कहा- भारत की नागरिकता दें या वापस भेजा जाए

महिलाओं ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार उन्हें पाकिस्तान या पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में अपने परिवार से मुलाकात करने के लिए यात्रा दस्तावेज मुहैया कराने से इनकार कर रही है।

Author नई दिल्ली | July 13, 2019 1:03 AM
पूर्व कश्मीरी आतंकवादियों की पाकिस्तानी पत्नियों ने शुक्रवार को केंद्र और जम्मू-कश्मीर सरकार से अपील की कि उन्हें या तो भारतीय नागरिकता प्रदान की जाए या वापस भेज दिया जाए।

नियंत्रण रेखा के उस पार से एक पुनर्वास योजना के तहत वापस आए पूर्व कश्मीरी आतंकवादियों की पाकिस्तानी पत्नियों ने शुक्रवार को केंद्र और जम्मू-कश्मीर सरकार से अपील की कि उन्हें या तो भारतीय नागरिकता प्रदान की जाए या वापस भेज दिया जाए। इन महिलाओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस जयशंकर, जम्मू कश्मीर के राज्यपाल एसपी मलिक के साथ ही पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के हस्तक्षेप की मांग की है, जिससे उनकी परेशानियां दूर हो सकें। महिलाओं ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार उन्हें पाकिस्तान या पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में अपने परिवार से मुलाकात करने के लिए यात्रा दस्तावेज मुहैया कराने से इनकार कर रही है।

उन महिलाओं में शामिल ऐबटाबाद की रहने वाली तैयबा ने मीडिया से कहा, ‘हम भारत सरकार और राज्य सरकार से अपील करती हैं कि या तो हमें पासपोर्ट प्रदान किया जाए या वापस जाने के लिए यात्रा दस्तावेज प्रदान किया जाए। हम कुल 350 महिलाएं हैं। हमें यहां का नागरिक बनाया जाए, जैसा किसी भी देश में पुरुषों के साथ विवाह करने वाली महिलाओं के साथ होता है। या फिर लौटने का इंतजाम किया जाए।’ इन महिलाओं ने संयुक्त राष्ट्र और दुनिया भर के मानवाधिकार संगठनों से भी अपील की कि वे उनके मामले को भारत और पाकिस्तान के साथ उठाएं। ये महिलाएं इससे पहले अपनी मांगें पूरी कराने के लिए सरकार पर दबाव बनाने के वास्ते पहले भी प्रदर्शन कर चुकी हैं।

गौरतलब है कि उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली जम्मू कश्मीर की तत्कालीन राज्य सरकार ने 2010 में कश्मीर के उन पूर्व आतंकवादियों के लिए एक पुनर्वास नीति की घोषणा की थी जो 1989 से 2009 के बीच पाकिस्तान चले गए थे। तत्कालीन सरकार ने उनकी वापसी के लिए चार जगहें निर्धारित की थीं, जिनमें वाघा अटारी, सलामबाद, चकन दा बाग और दिल्ली में इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा शामिल था। नेपाल के रास्ते को गैर आधिकारिक रूप से मंजूर किया गया था। हथियारों के प्रशिक्षण के लिए नियंत्रण रेखा पार करके उस ओर गए सैकड़ों व्यक्ति 2016 तक अपने परिवार के साथ नेपाल सीमा के रास्ते वापस आए। उसके बाद केंद्र ने इस नीति को बंद कर दिया। तब से इन महिलाओं और ऐसे परिवारों का मामला लटका हुआ है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App