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वैदिक शिक्षा बोर्ड के प्रस्ताव पर विचार करेगी सरकार, वेद मंत्रोच्चार को बढ़ावा देने की मांग

पूर्व चुनाव आयुक्त एन गोपालस्वामी के नेतृत्व वाली समिति द्वारा वैदिक अध्ययन को लेकर अलग बोर्ड बनाने के सुझाव के बारे में पूछे जाने पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वह इस विषय के विभिन्न आयामों को देखेंगे।

Author नई दिल्ली | August 22, 2016 7:17 AM

यूनेस्को धरोहर घोषित किए जा चुके वैदिक मंत्रोच्चार के अध्ययन की विधा को बढ़ावा देने और इस प्राचीन धरोहर को जीवंत बनाए रखने के लिए वैदिक शिक्षा बोर्ड गठित करने की विभिन्न वर्गो की मांग के बीच सरकार ने कहा है कि वह इसके विभिन्न आयामों पर विचार करेगी। यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार वैदिक शिक्षा बोर्ड गठित करने पर विचार कर रही है, मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा, ‘वह इस विषय को देखेंगे।’ पूर्व चुनाव आयुक्त एन गोपालस्वामी के नेतृत्व वाली समिति द्वारा वैदिक अध्ययन को लेकर अलग बोर्ड बनाने के सुझाव के बारे में पूछे जाने पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वह इस विषय के विभिन्न आयामों को देखेंगे।

इससे पहले एक समारोह को संबोधित करते हुए जावडेकर ने कहा था कि दुनिया के अनेक विश्वविद्यालयों में संस्कृत पुस्तकों, स्मृतियों एवं ग्रंथों का अध्ययन किया जा रहा है। सरकार संस्कृत समेत सभी भारतीय भाषाओं को पोषित करने की नीति को बढ़ा रही है और नयी शिक्षा नीति पर परिचर्चा में संस्कृत को पोषित करने का किसी ने विरोध नहीं किया है। मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि वैदिक शिक्षा बोर्ड के प्रस्ताव के बारे में एक विशेषज्ञ समिति इसकी संभावनाओं पर विचार कर रही है। शिक्षाविदों ने बदलते माहौल में बच्चों को नैतिक मूल्यों पर आधारित आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रमाणपत्रों का मान्यता देने, अनुभवी गुरुओं को शिक्षा पद्धति से जोड़ने और देश के प्रत्येक जिले में वैदिक पाठशाला स्थापित करने का सुझाव दिया है। शिक्षाविदों ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय से संबद्ध महर्षि संदीपनी राष्ट्रीय वेद विद्यालय को प्रस्तावित वैदिक शिक्षा बोर्ड के लिए शीर्ष संस्थान बनाए जाने पर जोर दिया है।

शिक्षाविद एवं वेद विद्या गुरुकुल के संस्थापक पीके मित्तल ने कहा कि देश की संस्कृति को आगे बढ़ाने एवं दुनिया में इसके महत्व को स्थापित करने के लिए वेद परंपराओं के संरक्षण की जरूरत है, जो धीरे धीरे लुप्त होती जा रही है। वैदिक बोर्ड बने, कसौटी को कड़ा किया जाए और मानकों को सुदृढ़ बनाते हुए गुरुओं और छात्रों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। बोर्ड में वेद से जुड़े विद्वानों को भी स्थान दिया जाए। अखिल भारतीय वेद शिक्षा परिषद और सामाजिक संस्था सहस्त्रधारा ने इस विषय पर एचआरडी मंत्रालय को ज्ञापन भेजा है। इसमें कहा गया है कि वैदिक शिक्षा को आधुनिक संदर्भ में बढ़ावा देने के लिए वैदिक शिक्षा बोर्ड बिना देरी किए स्थापित किया जाए और शिक्षकों के वेतनमान एवं छात्रों की डिग्री को अन्य संकायों के समकक्ष बनाया जाए। वैदिक शिक्षा बोर्ड को लेकर सरकार के समक्ष शिक्षकों एवं छात्रों की चिंताओंं को व्यक्त करते हुए ज्ञापन सौंपा गया है।

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