ताज़ा खबर
 

कालेधन वालों के मामले में सरकार को दिक्कत

विदेश में जमा भारतीयों के काले धन के मुद्दे पर खासी जगहंसाई के बाद भी मोदी सरकार संवेदनशील नहीं लगती। लोकसभा चुनाव से पहले खुद मोदी ने देश का लाखों करोड़ रुपया विदेश में जमा होने का खुलासा किया था।

Author नई दिल्ली | January 4, 2016 01:10 am

विदेश में जमा भारतीयों के काले धन के मुद्दे पर खासी जगहंसाई के बाद भी मोदी सरकार संवेदनशील नहीं लगती। लोकसभा चुनाव से पहले खुद मोदी ने देश का लाखों करोड़ रुपया विदेश में जमा होने का खुलासा किया था। उन्होंने अनुमान के आधार पर दावा किया था कि उनकी सरकार बनने के बाद यह काला धन वापस लाया जाएगा। यह रकम इतनी होगी कि हर नागरिक के हिस्से पंद्रह लाख रुपए आएंगे। पर इस वादे पर अभी तक तो खरी नहीं उतर पाई है सरकार।

पिछले दिनों सरकार ने विदेश में काला धन रखने वालों के लिए माफी की योजना चलाई थी। खुद अपने काले धन का खुलासा करने वालों पर कोई आपराधिक कार्रवाई न करने का भरोसा दिया था। आयकर की सामान्य दर से कर वसूल कर विदेश से लाए जाने वाले काले धन को सफेद घोषित करने का नियम भी लागू किया था। लेकिन समय सीमा बीत जाने के बाद सरकार ने बताया कि जुलाई से सितंबर 2015 के दौरान महज 638 लोगों ने माना कि उनका विदेश में काला धन है। पर यह रकम महज 4147 करोड़ रुपए ही निकली। इसके बाद सरकार ने कालाधन विदेश में रखने को दंडनीय अपराध बना दिया।

विदेश से आने वाली काले धन की रकम 4147 करोड़ को अगर सवा सौ करोड़ भारतीयों में बांटा जाए तो एक के हिस्से में बमुश्किल 35 रुपए आएंगे। बहरहाल हैरानी की बात दूसरी है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में वादा किया था कि विदेश में काला धन रखने वालों के नाम सरकार उजागर करेगी। पर जिन 638 लोगों ने खुद काला धन विदेश में रखने की बात स्वीकार की है, केंद्र सरकार उनके नामों का भी खुलासा करने को राजी नहीं।

मध्य प्रदेश के नीमच शहर में रहने वाले आरटीआइ कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने आयकर विभाग से इस बाबत सूचना के अधिकार के कानून के तहत जानकारी मांगी थी। उन्होंने जानना चाहा था कि खुलासा करने वालों में क्या कोई पूर्व प्रधानमंत्री या उसके परिवार का सदस्य भी है। कोई पूर्व या मौजूदा मुख्यमंत्री, राज्यपाल, सांसद और विधायक इनमें है या नहीं। काला धन घोषित करने वालों में नौकरशाह कितने हैं? क्या कोई फिल्मी हस्ती भी इसमें शामिल है।

आयकर विभाग ने गौड़ के सवालों का कोई जवाब नहीं दिया। इसके लिए आड़ आरटीआइ कानून के ही एक प्रावधान की ली गई। टका सा जवाब दे दिया कि तीसरे पक्ष (विदेश में कालाधन रखने वाले आयकर चोर) के बारे में धारा 8 के प्रतिबंध के कारण कोई सूचना नहीं दी जा सकती। सरकार का यह जवाब सुप्रीम कोर्ट में दिए गए हलफनामे के विपरीत है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने जब सरकार को हड़काया था तो उसने विदेश में काला धन रखने वाले कुछ नामों का खुलासा किया था। पारदर्शिता की दुहाई देने वाली सरकार अगर 638 लोगों के नामों का खुलासा करे तो इससे समाज में अच्छा संदेश जा सकता है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App