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सरकारी अधिकारियों पर मनीष सिसोदिया की टिप्पणी लैंगिक रूप से असंवेदनशील: कर्मचारी संघ

दिल्ली सरकार कर्मचारी संयुक्त मंच के प्रतिनिधियों ने कहा कि नौकरशाहों और वर्तमान हालात से संबंधित सिसोदिया द्वारा मंगलवार को नई दिल्ली में एक राष्ट्रीय सम्मेलन में की गई टिप्पणी अत्यंत ही लैंगिक असंवेदनशील और निंदनीय है।

Author नई दिल्ली | February 28, 2018 7:33 PM
दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया। (फाइल फोटो)

सरकारी कर्मचारी संघ ने बुधवार को दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की सरकारी अधिकारियों पर की गई टिप्पणी को लैंगिक रूप से असंवेदनशील और निंदनीय करार दिया। संवाददाताओं को संबोधित करते हुए दिल्ली सरकार कर्मचारी संयुक्त मंच के प्रतिनिधियों ने कहा कि नौकरशाहों और वर्तमान हालात से संबंधित सिसोदिया द्वारा मंगलवार को नई दिल्ली में एक राष्ट्रीय सम्मेलन में की गई टिप्पणी अत्यंत ही लैंगिक असंवेदनशील और निंदनीय है। मुख्य सचिव पर आम आदमी विधायकों द्वारा कथित हमले के बाद पिछले सप्ताह के फैसले पर कर्मचारी संघ अडिग है कि कर्मी ना तो बैठकों में शामिल होंगे और न ही मंत्रियों के साथ फोन पर बात करेंगे।

मुख्य सचिव ने पिछले सप्ताह आरोप लगाया था कि 19 फरवरी को मुख्यमंत्री आवास पर अरविंद केजरीवाल की मौजूदगी में उनके साथ आप विधायक अमानतुल्ला खान और अन्य आप विधायक ने हाथापाई की थी। आवास पर उन्हें एक बैठक के लिए बुलाया गया था। कर्मचारी संघ ने कहा था कि मंत्रियों और विधायकों से संपर्क तभी होगा जब कथित हमले के लिए केजरीवाल और सिसोदिया लिखित सार्वजनिक माफी नहीं मांग लेते।

संघ ने इस बात को माना कि सामाजिक कल्याण मंत्री राजेंद्र पाल गौतम और परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने समस्या के समाधान के लिए प्रयास किए लेकिन वह लिखित में सार्वजनिक माफी की मांग पर कायम है। वहीं, दिल्ली के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के साथ मारपीट मामले में आम आदमी पार्टी और उप राज्यपाल अनिल बैजल ने एक-दूसरे पर निशाना साधा। पिछले दिनों हुई इस घटना के बाद आईएएस एसोसिएशन ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से माफी मांगने तक किसी भी सरकारी बैठक में हिस्सा नहीं लेने की घोषणा की थी।

उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बुधवार को बैजल के मंगलवार को केजरीवाल को लिखे पत्र का जवाब दिया। इससे पहले सिसोदिया ने बैजल को पत्र लिखा था। सिसोदिया ने अपने में पत्र में, मंत्रियों द्वारा बुलाई गई बैठकों में नौकरशाहों के भाग नहीं लेने पर उपराज्यपाल से हस्तक्षेप करने की मांग की थी। इसके बाद बैजल ने मंगलवार को पत्र लिखा जिसमें उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारी लोकतंत्र और कानून का शासन बनाए रखने के लिए चुने गए प्रतिनिधियों की उपस्थिति में शारीरिक रूप से असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

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