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सरकार को नहीं मालूम देश में हैं कितने एंग्लो इंडियन

भारतीय संसद में एंग्लो इंडियन समुदाय के लिए आरक्षित दो सीट सवा साल से खाली पड़ी हैं। इस समुदाय की ओर से सरकार पर इन दोनों सीटों को भरने का दबाव है।
Author नई दिल्ली | June 9, 2016 02:52 am
केंद्रीय गृह मंत्रालय।

भारतीय संसद में एंग्लो इंडियन समुदाय के लिए आरक्षित दो सीट सवा साल से खाली पड़ी हैं। इस समुदाय की ओर से सरकार पर इन दोनों सीटों को भरने का दबाव है। लेकिन भारत सरकार के पास मौजूदा समय में देश में इस खास समुदाय के लोगों की जनसंख्या का आंकड़ा नहीं है। सरकार को मालूम ही नहीं है कि देश में एंग्लो इंडियन समुदाय के कितने लोग रहते हैं। सूचना के अधिकार (आरटीआइ) के तहत इस संबंध में जानकारी मांगी गई थी लेकिन सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के पास इसका कोई आंकड़ा नहीं है। सीट खाली रह जाने के कारण इस समुदाय के लोगों के लिए संसदीय निधि भी आबंटित नहीं की जा सकी है।

राजस्थान के मेवाड़ विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रहे शोधार्थी राजीव गुप्ता ने इस साल फरवरी में गृह मंत्रालय के विदेश विभाग से जानकारी मांगी थी कि भारत में एंग्लो इंडियन समुदाय के कितने लोग रह रहे हैं। उस वक्त गृह मंत्रालय ने आधी-अधूरी जानकारी दी तो गुप्ता ने अप्रैल में इसी सवाल की मुकम्मल जानकारी मांगते हुए फिर से आरटीआइ की अर्जी दी। गृह मंत्रालय ने इस अर्जी को सांख्यिकी और कार्यान्यवन मंत्रालय को भेज दिया और उसने कहा कि हमारे पास इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है।

17वीं सदी में ईस्ट इंडिया कंपनी भारत में दाखिल हुई और उसके बाद ब्रितानी हुकूमत ने भारत पर दो सौ सालों तक राज किया। प्रशासनिक और सैन्य अधिकारियों के रूप में ब्रितानियों का एक बहुत बड़ा तबका भी भारत आया और यहां उनकी कई पीढ़ियां भी आगे बढ़ीं और भारतीय व यूरोपीय समुदाय के बीच वैवाहिक संबंध भी बने। यूरोपीय और भारतीयों की मिली-जुली नस्ल को एंग्लो इंडियन कहा जाने लगा। हालांकि 1857 के गदर के बाद ब्रितानी हुकूमत ने कानून बनाकर अंग्रेजों को भारतीयों से शादी करने पर प्रतिबंध लगा दिया।

1947 में आजादी के वक्त भारत में लगभग पांच लाख एंग्लो इंडियन थे। इसलिए देश में इनके हितों की रक्षा के लिए जवाहरलाल नेहरू सरकार ने लोकसभा में इनके लिए दो सीटें आरक्षित कीं। इन दो सीटों पर मनोनयन के द्वारा एंग्लो इंडियन समुदाय का संसद में प्रतिनिधित्व तय किया गया। फिलहाल 2020 तक इनके मनोनयन का प्रावधान है। अभी अनुमान के तहत इनकी संख्या सवा लाख के आसपास बताई जाती है।

वैसे तो ये देश के कई हिस्सों में हैं लेकिन इनकी सबसे ज्यादा जनसंख्या कोलकाता और चेन्नई में है। आजादी के बाद इस मिली-जुली नस्ल को ‘शुद्धतावादी’ कारणों से भारत में दिक्कतें भी हुई थीं और बहुत से लोग यहां से चले भी गए थे। लेकिन आज के दौर में अपने रंग-रूप और यूरोपीय मिश्रित भारतीय शैली के कारण इनका सम्मान है। लेखक जॉर्ज आरवेल, रुडयर्ड किपलिंग और रस्किन बांड एंग्लो इंडियन समुदाय से नाता रखते हैं। अभिनेत्री कैटरीना कैफ, पूर्व वायुसेनाअध्यक्ष अनिल कुमार ब्राउनी, क्रिकेटर नासिर हुसैन, फुटबॉलर माइकल चोपड़ा और अभिनेता बेन किंग्सले कुछ मशहूर एंग्लो इंडियन चेहरे हैं।

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