बाढ़ का जायजा लेने BJP सांसद पहुंचे योगी के गढ़ गोरखपुर, हुआ विरोध; लोगों ने पूछा जब पानी कम हो गया तो क्या करने आए?

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ कहे जाने वाले गोरखपुर में बीजेपी सांसद कमलेश पासवान को उस वक्त लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ा जब वह बाढ़ पीड़ित इलाके का दौरा करने पहुंचे थे।

Kamlesh Paswan
बाएं- कमलेश पासवान द्वारा ट्विटर हैंडल पर शेयर की गई तस्वीर, दाएं- वायरल वीडियो के ग्रैब

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ कहे जाने वाले गोरखपुर में बीजेपी सांसद कमलेश पासवान को उस वक्त लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ा जब वह बाढ़ पीड़ित इलाके का दौरा करने पहुंचे थे। बीजेपी सांसद जैसे ही लोगों के बीच पहुंचे तो लोगों ने उनसे सवाल पूछना शुरू कर दिया। स्थानीय लोगों की शिकायत थी कि जब बाढ़ अपने चरम पर थी तब कोई सुध लेने नहीं आया। ऐसा ही हाल कोरोना के दिनों में था, लोगों का आरोप था कि जनता भटक रही थी लेकिन मदद के लिए कोई नहीं आया।

गांव का दौरा करने पहुंचे जिलाधिकारी विजय किरण आनंद भी मौके पर पहुंचे और लोगों को समझा बुझा कर शांत कराया। बांसगांव सीट से सांसद कमलेश पासवान के खिलाफ लोगों को गुस्सा था कि बांध टूटने के कारण भारी तबाही की स्थिति हो गई थी, सांसद या उनके प्रतिनिधि लोगों के लिए नहीं पहुंचे थे। लोगों ने कहा कि अब जब पानी कम हो गया है कि तो आप क्या करने आए हैं। ग्रामीणों के विरोध का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।

एक तरफ सीएम योगी बाढ़ प्रभावित इलाकों का तूफानी दौरा कर रहे हैं, वह तमाम जिलों में राहत सामग्री बांटते और जहाज के जरिए हालातों का जायजा ले रहे हैं वहीं दूसरी तरफ उन्हीं के गढ़ में बीजेपी प्रतिनिधि का विरोध भी देखने को मिल रहा है। आपदा की इस घड़ी में ग्रामीण हर जनप्रतिनिधि से मदद का इंतजार कर रहा है, ऐसे में कई इलाकों में जनप्रतिनिधियों के नहीं पहुंचने से नाराजगी देखने को मिलती है।

बाढ़ की स्थिति: गोरखपुर में पांच नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ है, जिसमें राप्ती, रोहिन, गोर्रा, घाघरा और आमी नदी शामिल है। नदियों का जलस्तर कम होना शुरू हो चुका है लेकिन 400 से ज्यादा गांव अभी भी पानी में डूबे हुए हैं। हजारों की संख्या में लोग स्टेशन, बस स्टैंड, सरायों और सड़कों पर रहने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों की शिकायत है कि बाढ़ के दौरान सांसद कमलेश पासवान का यह पहला दौरा है। बांध टूट जाने के बाद करीब 30 हजार लोग प्रभावित हुए, न बच्चों को दूध मिल पा रहा था और न मवेशियों को चारा। उन्होंने कहा कि अब जब बाढ़ का पानी कम हुआ है तो सांसद लोगों से मिलने आए हैं।

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