साहित्यकारों का सियासत करना दुखद : नीरज - Jansatta
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साहित्यकारों का सियासत करना दुखद : नीरज

कवि और गीतकार गोपालदास ‘नीरज’ ने देश में ‘बढ़ती असहिष्णुता’ के विरोध में साहित्यकारों द्वारा अपने सम्मान लौटाए जाने पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है कि अदीबों का यों सियासत करना बेहद दुखद है..

Author बरेली | January 1, 2016 12:54 AM
कवि और गीतकार गोपालदास ‘नीरज’

कवि और गीतकार गोपालदास ‘नीरज’ ने देश में ‘बढ़ती असहिष्णुता’ के विरोध में साहित्यकारों द्वारा अपने सम्मान लौटाए जाने पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है कि अदीबों का यों सियासत करना बेहद दुखद है और इसके जरिए पूरे देश की मान-मर्यादा से खिलवाड़ हो रहा है। नीरज ने यहां आयोजित अंतरराष्ट्रीय मुशायरे और कवि सम्मेलन में शिरकत के दौरान संवाददाताओं से बातचीत में कहा ‘यह दुख की बात है कि अब साहित्यकार भी सियासत करने लगे हैं। देश में किसी भी तरह की असहिष्णुता नहीं है। झूठी बात प्रचारित करने वाले लोग पूरे देश की मान-मर्यादा से खिलवाड़ कर रहे हैं।’

उन्होंने पिछले दिनों देश में असहिष्णुता बढ़ने का आरोप लगाते हुए इसके विरोध में अपने पुरस्कार लौटाने वाले साहित्यकारों को कांग्रेस का ‘चाटुकार’ करार दिया था और कहा था कि कांग्रेस की हुकूमत में जिन्हें पुरस्कार मिला, उन्होंने ही स्वामी भक्ति का प्रदर्शन करते हुए उसे वापस कर दिया। ‘पद्म भूषण’ से नवाजे जा चुके इस साहित्यकार ने अवार्ड लौटाने वाले साहित्यकारों पर दोहरे पैमाने अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि जब लाखों कश्मीरी पंडितों को उनके ही वतन से बेदखल किया गया तब किसी साहित्यकार की आत्मा नहीं जागी। आज बहुमत से चुनी गई सरकार के खिलाफ रची गई साजिश में शामिल होकर वे अवार्ड वापस कर रहे हैं। नीरज ने खासकर समाजवादी पार्टी में बढ़ते परिवारवाद पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया मगर कहा कि परिवारवाद तो इंदिरा गांधी ने शुरू किया था। उन्होंने नरेंद्र मोदी को ऊर्जावान प्रधानमंत्री और अखिलेश यादव को नई और सकारात्मक सोच का मुख्यमंत्री बताया।

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