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कौन हैं गोल्डन बाबा, जो शरीर पर साढ़े छह करोड़ का सोना पहन निकले कांवड़ यात्रा पर

Golden Baba Haridwar, Kawad Kanwar Yatra 2018 Jal Date: बाबा ने इसके साथ ही इस बार 27 लाख रुपए की रोलेक्स की लग्जरी घड़ी भी पहनी है। यह उनकी 25वीं कांवड़ यात्रा है।

गोल्डन बाबा को सोने और घड़ियों के अलावा कारों का भी शौक है।

सावन माह में सोने के आभूषण पहनकर कांवड़ यात्रा में हिस्सा लेने वाले गोल्डन बाबा एक बार फिर से लौट आए हैं। न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, बाबा हरिद्वार से 20 किलो सोने के आभूषण पहनकर यात्रा पर निकले हैं, जिनकी कीमत तकरीबन साढ़े छह करोड़ रुपए के आसपास बताई जा रही है। उन्होंने इसके साथ ही इस बार 27 लाख रुपए की रोलेक्स की लग्जरी घड़ी भी पहनी है। यह उनकी 25वीं कांवड़ यात्रा है। गोल्डन बाबा ने पत्रकारों को बताया, “यात्रा पर लगभग सवा करोड़ रुपए का खर्च आता है। मैं जहां जाता हूं, लोग मुझे देखने को जुट जाते हैं। ऐसे में पुलिस मेरी सुरक्षा करती है।”

करीब से जानें बाबा कोः जूना अखाड़े के महंत और गोल्डन बाबा का असली नाम सुधीर मक्कड़ है। उन्हें गोल्डन पुरी के नाम से भी जाना जाता है। पहले वह दिल्ली के गांधी नगर में कारोबारी हुआ करते थे। वह तब बिट्टू लाइटबाज के नाम मशहूर थे। हालांकि, उन पर कुछ आपराधिक मामले भी दर्ज हैं। ऐसा बताया जाता है कि अपने क्रिमिनल रिकॉर्ड से दूर भागने के लिए वह संन्यास की राह पर बढ़े।

पहन चुके हैं सोने की जैकेटः साल 2016 में उन्होंने 12 किलोग्राम सोने के आभूषण पहने थे, जबकि पिछले साल (2017 में) वह साढ़े 14 किलो के सोने के गहने पहन कर कांवड़ यात्रा पर निकले थे, जिसमें 21 सोने की चेनें, 21 देवी-देवताओं के लॉकेट, बाजूबंद और यहां तक कि एक सोने की जैकेट भी शामिल थी। वह इस जैकेट को यात्रा के दौरान कार में ऊपर बैठने के वक्त पहना करते थे।

कारों के भी हैं शौकीनः मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाबा के सोने के आभूषण और महंगी घड़ियों के अलावा आलीशान गाड़ियों के भी काफी शौकीन हैं। उनके पास एक बीएमडब्ल्यू, तीन फॉर्च्यूनर, दो ऑडी और दो इनोवा कारें हैं, जबकि कुछ मौकों पर वह हमर, जगुआर और लैंडरोवर सरीखी गाड़ियां किराए पर हरिद्वार की ट्रिप के लिए ले लेते हैं।

‘अंतिम समय तक साथ रखूंगा सोना’: मक्कड़ ने एक अखाबर को पिछले साल बताया था, “सोने और गाड़ियों के प्रति मेरा प्रेम कभी भी खत्म नहीं होगा। 1972 से 73 के बीच 10 ग्राम सोने की कीमत 200 रुपए थी। मैंने उसी दौरान से सोना पहनना शुरू किया था और तब मेरे पास 40 ग्राम सोना था। समय के साथ सोने की मात्रा भी बढ़ी। मैं अपनी मृत्यु तक सोना अपने साथ रखूंगा और जब मैं इस दुनिया को अलविदा कहूंगा, तो ये सारा सोना मेरे पसंदीदा शिष्य के हवाले कर दिया जाएगा।”

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