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ट्रेन में सीट मांगने पर युवती से पुरुष यात्री बोला- ऐसे कपड़े पहनकर मत आना, फेसबुक पोस्ट हुई वायरल

पश्चिम बंगाल में एक युवती ने सोशल मीडिया पर अपनी आपबीती शेयर करके उसके साथ ट्रेन में की गई कथित बदतमीजी के लिए नैतिक समर्थन मांगा है। युवती ने इसकी शिकायत पुलिस में भी की है।

युवती के द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो से लिया गया स्क्रीनशॉट।

पश्चिम बंगाल में एक युवती ने सोशल मीडिया पर अपनी आपबीती शेयर करके उसके साथ ट्रेन में की गई कथित बदतमीजी के लिए नैतिक समर्थन मांगा है। युवती ने इसकी शिकायत पुलिस में भी की है। घटना शनिवार (23 जून) की रात की है जब मल्टी नेशनल कंपनी में काम करने वाला एक 28 वर्षीय कर्मचारी अपनी 24 वर्षीय गर्लफ्रेंड के साथ कोलकाता के सियालदाह स्टेशन से बैरकपुर के लिए ट्रेन के जनरल डिब्बे में सफर कर रहा था। दोनों ने सियालदाह के व्यस्त स्टेशन से रात के 9 बजे कृष्णानगर लोकल ट्रेन पकड़ी थी। युवक और युवती साथ में बैठ सकें, इसलिए ट्रेन में एक अधेड़ शख्स से थोड़ा खिसकने के लिए गुहार लगाई। शख्स ने यह कहते हुए जगह देने से मना कर दिया कि उसे पंखे की हवा नहीं लगेगी। फिर युवक और युवती ने किसी प्रकार तंग जगह में बैठने का फैसला किया। इस दौरान मौके पर कुछ तकरार हुई लेकिन स्थिति काबू में नहीं रह सकी। स्थिति तब और बदतर हो गई जब ट्रेन अपनी मंजिल के करीब पहुंची और उसी कंपार्टमेंट में कुछ और यात्री चढ़े।

एक आदमी ने बहस में कूदकर युवक और युवती से कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया। उसने युवती के पहनावे पर सवाल खड़ा किया। पूरी घटना को युवती ने अपने मोबाइल फोन के कैमरे में कैद कर लिया। युवती ने अपने साथ घटी इस घटना को फेसबुक पर पोस्ट किया और गवर्नमेंट रेलवे पुलिस में शिकायत की। युवती ने अपनी फेसबुक पोस्ट में रोमन लिपि में ज्यादातर बंगाली का इस्तेमाल किया है।

युवती की फेसबुक पोस्ट के मुताबिक, ”हर दिन की तरह, मैं सियालदाह से ट्रेन में चढ़ी। मैंने कुछ लोगों से सीट में कुछ जगह बनाने के लिए कहा ताकि बैठ सकें लेकिन उन्होंने बेरुखी से मना कर दिया। उनमें से एक ने कहा कि वह पंखे के नीचे की अपनी जगह नहीं छोड़ेगा। किसी प्रकार हम जगह बनाने में सफल हुए, तभी साथी यात्री चिल्लाने लगे, ‘यह लेडीज कंपार्टमेंट नहीं है, लेडीज कंपार्टमेंट में जाओ।’ लगता है कि इन अनपढ़ लोगों को नहीं पता था कि यह एक जनरल कंपार्टमेंट था, न कि खास पुरुषों वाला। आखिर में हमने सीट छोड़ दी और आगे बढ़ गए। अब वह आदमी जो पहले फंखे नीचे बैठे होने कारण सीट पर खिसकने से मना कर रहा था, खिसकर वहां आ गया जहां हम बैठे थे।

तभी मैंने उससे पूछा, काकू, अब आप क्यों खिसक रहे हैं? क्या अब आपको गर्मी नहीं लग रही है? इस पर उसने जवाब दिया, ‘घर जाओ और एक-दूसरे की गोद में बैठो।’ और तभी कुछ और लोग बोले, ‘तुम्हारी पीढ़ी के लोगों की वजह से कोलकाता मेट्रो की घटना हुई थी।’ एक और शख्स बोला, ‘ट्रेन में ऐसे कपड़े पहनकर मत आना। (मैंने टीशर्ट और जींस पहनी हुई थी।) मैं बस यह कहना चाहती हूं, क्या यह आपका देश है? जहां महिला होने का मतलब है कि ऐसी बातें सुनें? क्या यह हमारा नया समाज है, जहां ट्रेनों और बसों में ऐसा व्यवहार दैनिक दिनचर्या है? मैं सिर्फ पूछना चाहती हूं, क्या यह व्यवहार वरिष्ठ नागरिकों (बीमारों) से अपेक्षित किया जा सकता है?”

बता दें कि पिछले दिनों कोलकाता मेट्रो में एक युवक और युवती के कथित तौर पर गले मिलने पर साथी यात्रियों ने आपत्ति दर्ज कराई थी और उनकी बेरहमी से पिटाई कर दी थी।

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