गाजियाबाद में पोलियो निगरानी के तहत की गई नियमित सीवेज जांच में एक अहम अलर्ट सामने आया है। डूंडाहेड़ा स्थित एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) से लिए गए नमूने में वैक्सीन-व्युत्पन्न पोलियोवायरस (VDPV) टाइप-1 की पुष्टि हुई है। दिल्ली स्थित प्रयोगशाला से रिपोर्ट मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत शहरी इलाकों में निगरानी और टीकाकरण अभियान तेज कर दिया है।
यह मामला इसलिए गंभीर माना जा रहा है क्योंकि भारत को पोलियो मुक्त देश घोषित किया जा चुका है, लेकिन पर्यावरणीय निगरानी के दौरान वायरस की मौजूदगी यह संकेत देती है कि संक्रमण का जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। गाजियाबाद के डूंडाहेड़ा एसटीपी से नियमित जांच के लिए भेजे गए नमूने में इस वायरस की पुष्टि के बाद स्वास्थ्य तंत्र सतर्क हो गया है।
रिपोर्ट सामने आने के बाद जिला स्तर पर आपात बैठक बुलाई गई, जिसमें शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारियों के साथ स्थिति की समीक्षा की गई। इसके बाद तय किया गया कि 12 शहरी पीएचसी के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में व्यापक डोर-टू-डोर अभियान चलाया जाएगा। इस काम के लिए कुल 107 टीमें लगाई गई हैं, जिनमें आशा कार्यकर्ता, एएनएम और अन्य स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं।
ये टीमें 5 वर्ष तक के बच्चों की जांच करेंगी और जिन बच्चों का टीकाकरण पूरा नहीं है, उन्हें पोलियो ड्रॉप्स भी पिलाई जाएंगी। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी संभावित संवेदनशील बच्चे तक संक्रमण का खतरा न पहुंचे और टीकाकरण कवरेज पूरी तरह अपडेट रहे।
राजनगर, शास्त्रीनगर, हिंडन विहार आदि इलाकों में खास निगरानी
स्वास्थ्य विभाग की निगरानी के दायरे में अब जिन इलाकों को प्राथमिकता दी गई है उनमें राजनगर, शास्त्रीनगर, बुलंदशहर रोड औद्योगिक क्षेत्र, दौलतपुरा, न्यू पंचवटी, घुकना, हिंडन विहार, कैला भट्टा, मिर्जापुर, विजय नगर (सेक्टर 1 और 2) तथा खैराती नगर शामिल हैं। इन क्षेत्रों में सर्वे और टीकाकरण अभियान तेज कर दिया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, वैक्सीन-व्युत्पन्न पोलियोवायरस उन परिस्थितियों में पनप सकता है जब वायरस कम टीकाकरण वाले समुदायों में पहुंच जाए और वहां स्वच्छता व्यवस्था कमजोर हो। ऐसे मामलों में यह संक्रमण फेकल-ओरल मार्ग से फैल सकता है और विशेष रूप से उन बच्चों के लिए जोखिम पैदा करता है जिनका टीकाकरण अधूरा है या जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है।
स्वास्थ्य अधिकारियों का मानना है कि यह वायरस किसी संक्रमित व्यक्ति के जरिए सीवरेज सिस्टम तक पहुंचा हो सकता है, जहां से नमूने में इसकी मौजूदगी दर्ज की गई। हालांकि, यह तय करने के लिए विस्तृत जांच जारी है कि संक्रमण का वास्तविक स्रोत क्या है और क्या यह किसी सीमित क्षेत्र तक ही केंद्रित है।
जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. आरके गुप्ता के अनुसार, इस तरह की रिपोर्ट को गंभीर संकेत के रूप में लिया गया है और नियंत्रण के लिए तत्काल कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने मीडिया से कहा कि हर प्रभावित क्षेत्र में बच्चों की जांच और टीकाकरण सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि किसी भी संभावित जोखिम को समय रहते रोका जा सके।
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ब्रेन ट्यूमर (Brain Tumor) यह एक ऐसा शब्द है जिसे सुनते ही लोगों के पैरों तले जमीन खिसक जाती है। ज्यादातर लोग इसे एक जानलेवा और कभी न ठीक होने वाली बीमारी मान लेते हैं, लेकिन चिकित्सा विज्ञान की तरक्की और मजबूत इच्छाशक्ति इस धारणा को गलत साबित कर सकती है। 38 साल की उम्र में जब अमित मेहरा (बदला हुआ नाम) को ब्रेन ट्यूमर का पता चला, तो उनके सामने भी अनगिनत चुनौतियां थीं। लेकिन सही समय पर डायग्नोसिस, सफल सर्जरी और सटीक इलाज के बाद आज अमित न सिर्फ पूरी तरह स्वस्थ हैं, बल्कि अपनी नौकरी करने के साथ-साथ क्रिकेट भी खेल रहे हैं और बिल्कुल नॉर्मल जीवन जी रहे हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
