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अखिलेश यादव और मुलायम सिंह गुट से चुनाव आयोग ने कहा- MP, MLA, MLC के हस्ताक्षर युक्त एफिडेविट देकर साबित करो अपनी ताकत

एक ही राजनीतिक दल के अंदर दो गुटों में किसे बहुमत प्राप्त है, इसका फैसला सबसे पहले चुनाव आयोग ने साल 1969 में किया था, जब कांग्रेस पार्टी दो गुटों में बंटी थी।

samajwadi party, caveat, akhilesh yadav, ram gopal yadavमुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव।

साइकिल किसकी होगी? इस पर फैसला होना बाकी है लेकिन इसकी दावेदारी लेकर चुनाव आयोग पहुंचे समाजवादी पार्टी के दोनों धड़ों को आयोग ने नोटिस जारी कर अपनी ताकत का इजहार करने को कहा है। अखिलेश यादव और मुलायम सिंह यादव गुट को आयोग की तरफ से कहा गया है कि दोनों गुट अपने-अपने समर्थन में सभी सांसदों, विधायकों और विधान पार्षदों का हस्ताक्षर युक्त शपथ पत्र 9 जनवरी तक आयोग को सौंप दें, ताकि आयोग जल्द ही इस पर कोई फैसला ले सके। हालांकि, समाजवादी पार्टी को दोनों धड़ों में सुलह की कोशिश अभी भी जारी है।

चुनाव आयोग के सूत्रों ने बताया कि चूंकि उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में चुनाव की तारीखों का एलान हो चुका है इसलिए आयोग इस मसले को जल्द से जल्द सुलझाना चाहता है। इसीलिए आयोग ने 9 जनवरी तक दोनों गुटों से अपने-अपने दावे पेश करने को कहा है। इस सप्ताह समाजवादी पार्टी के दोनों धड़ों के नेताओं ने चुनाव आयोग पहुंचकर चुनाव चिह्न पर अपनी-अपनी दावेदारी ठोकी थी। एक ही राजनीतिक दल के अंदर दो गुटों में किसे बहुमत प्राप्त है, इसका फैसला सबसे पहले चुनाव आयोग ने साल 1969 में किया था, जब कांग्रेस पार्टी दो गुटों में बंटी थी।

सूत्रों के मुताबिक रामगोपाल यादव ने मंगलवार को चुनाव आयोग में जो कागजात सौंपे हैं, उसमें दावा किया गया है कि अखिलेश यादव गुट ही असली समाजवादी पार्टी है। कागजात में यह भी दावा किया गया है कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को विधान सभा, विधान परिषद और लोकसभा, राज्य सभा के अधिकांश निर्वाचित सदस्यों का समर्थन प्राप्त है। करीब 100 पन्नों के इस कागजात में 5000 से ज्यादा पार्टी प्रतिनिधियों और 90 फीसदी सांसदों, विधायकों और विधान पार्षदों के हस्ताक्षर शामिल हैं।

दूसरी तरफ मुलायम गुट द्वारा सौंपे गए कागजात में कुछ लोगों के ही हस्ताक्षर हैं। बावजूद इसके आयोग ने दोनों गुटों से समर्थन दे रहे पार्टी प्रतिनिधियों के हस्ताक्षर युक्त शपथ पत्र सौंपने को कहा है। आयोग सूत्रों के मुताबिक, हस्ताक्षर युक्त शपथ पत्रों के आधार पर ही चुनाव आयोग यह निर्णय लेगा कि किसके पक्ष में बहुमत है और जिस पक्ष के पास बहुमत होगा उसे पार्टी का चुनाव चिह्न इस्तेमाल करने की इजाजत दी जाएगी।

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