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जर्मनी की कंपनी कानपुर में बनाएगी दुनिया के सबसे बेहतरीन कृत्रिम पैर

एल्मिको के प्रबंध निदेशक डीआर सरीन ने सोमवार को बताया कि हमने कृत्रिम उपकरण बनाने वाली कंपनी आटोकाप से 2015 के अंत में टेक्नालोजी ट्रांसफर का करार किया था।

कानपुर | May 30, 2016 11:38 PM
कृत्रिम पैर

जर्मनी की कृत्रिम अंग बनाने वाली मशहूर कंपनी आटोकाप अगले साल की शुरुआत से कानपुर की एल्किमो (आर्टिफिशियल लिंब्स मैन्युफैक्चरिंग कारपोरेशन) में कृत्रिम पैर बनाना शुरू करेगी। जर्मन कंपनी जितने कृत्रिम उपकरण कानपुर में बनाएगी, उसके तीस फीसद उपकरण दुनिया के अन्य देशों को बेचेगी। अभी तक आटोकाप कंपनी यह उपकरण चीन से लेती थी। प्रधानमंत्री की मेक इन इंडिया योजना को साकार करने के लिए केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय के अधीन काम करने वाले भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम (एल्मिको) और जर्मन कंपनी के बीच 2015 में एक करार हुआ था, जिसके तहत जर्मन कंपनी आटोकाप अपनी टेक्नालोजी एल्मिको को हस्तांतरित करेगी।

एल्मिको के प्रबंध निदेशक डीआर सरीन ने सोमवार को बताया कि हमने कृत्रिम उपकरण बनाने वाली कंपनी आटोकाप से 2015 के अंत में टेक्नालोजी ट्रांसफर का करार किया था। इसके तहत इस साल की शुरुआत में हमारे संस्थान के इंजीनियर और तकनीशियन की दस सदस्यीय टीम ने जर्मनी जाकर आटोकाप कंपनी में कृत्रिम पैर बनाने का प्रशिक्षण लिया। आटोकाप कंपनी कृत्रिम अंग बनाने की दुनिया की बेहतरीन कंपनियों में से एक है।

सरीन ने कहा कि अब जर्मनी की आटोकाप कंपनी जैसे कृत्रिम उपकरण बनाने की तैयारी कानपुर के एल्मिको में हो रही है। इसके लिए हमने एक कैंपस में ही एक भवन खाली कराया है। अब इन उपकरणों को बनाने के लिए मंगवाने की तैयारी की जा रही है। मशीनों की कीमत करीब पांच करोड़ रुपए है। उन्होंने कहा कि मशीनें आ जाने के बाद 2017 की शुरुआत में एल्मिको में कृत्रिम उपकरण बनाने का काम शुरू हो जाएगा। यह प्रधानमंत्री के मेक इन इंडिया योजना के तहत किया जाएगा। इसमें सभी उपकरण भारत के ही बने होंगे जबकि इसमें जर्मन तकनीकी इस्तेमाल की जाएगी।

सरीन ने कहा कि पहले साल में हमारा उच्च गुणवत्ता वाले 5,000 कृत्रिम पैर बनाने का लक्ष्य है। अगले पांच सालों में इसकी विनिर्माण क्षमता 10 हजार कृत्रिम पैर तक पहुंचाने की है। आटोकाप कंपनी के इस करार में एक अच्छाई यह भी है कि एल्मिको हर साल जितने कृत्रिम पैर बनाएगी, उसका 30 फीसद आटोकाप हमसे खरीद लेगी। अभी तक आटोकाप यह कृत्रिम पैर चीन से मंगाती थी। इससे हमारे देश को विदेशी मुद्रा भी मिलेगी और हमारा ब्रांड पूरी दुनिया में फैलेगा।

उन्होंने कहा कि संस्था के आधुनिकीकरण के लिए केंद्र सरकार ने 268 करोड़ रुपए की राशि मंजूर कर दी है, जिसकी पहली किस्त संस्थान को मिल चुकी है। अगले 37 महीनों में 2018 तक संस्था का आधुनिकीकरण हो जाएगा और आधुनिक उपकरणों के लिए हमें किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। सरीन के अनुसार केंद्र सरकार के सहयोग से एल्मिको 1972 से विकलांगों के लिए उपकरण जैसे बैसाखी, कृत्रिम टांग, हाथ, ट्राइसाइकिल, मोटर ट्राइसाइकिल, वील चेयर, सुनने की मशीनें आदि बना रही है और अब तक करोड़ों विकलांगों की जिंदगी में खुशियां भर चुकी है। एल्मिको के मुफ्त उपकरण बांटने के कैंप पूरे देश में लगाए जाते हैं।

उन्होंने बताया कि इस साल अब तक उनके पास पूरे भारत से 272 कैंप लगवाने के आवेदन आ चुके हंै। वह एक-एक कर सभी जगह कैंप लगाएंगे। 2015-16 में एल्मिको ने पूरे देश में 389 मुफ्त विकलांग कैंप लगाए थे जिसमें एक लाख 11 हजार 52 विकलांगों को मुफ्त उपकरण दिए गए थे। इन उपकरणों की कीमत करीब 80 करोड़ थी। इसी तरह सर्वशिक्षा अभियान के तहत छह से 14 साल के विकलांग बच्चों के लिए पिछले साल 115 कैंप लगाए गए, जिसमें 86 हजार 95 विकलांग बच्चों को 37 करोड़ रुपए के विभिन्न उपकरण गए।

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