भारत मंडपम में चल रहे ‘एआई इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन’ में कई निजी कंपनियां भविष्य में कृत्रिम मेधा (एआई) के कारण आम जीवन में होने वाले बदलावों को प्रदर्शित कर रही हैं, जोकि युवाओं को काफी भा रहा है। हॉल संख्या-चार में ‘जियो फ्रेम’ के बारे में जानकारी लेने वाले युवाओं की लंबी कतारें लगी हैं।

अपनी पॉवर के हिसाब से करा सकते हैं कस्टमाइज

‘मेटा’ आधारित यह एआई चश्मा उपयोगकर्ता को खाने में मौजूद कैलोरी की जानकारी तुरंत उपलब्ध कराता है। इतना ही नहीं, यदि किसी ऐतिहासिक स्थल या इमारत की तस्वीर दिखाकर उससे जानकारी मांगी जाए तो यह उसके इतिहास, संरचना और स्थान से जुड़ी विस्तृत जानकारी भी प्रदान करता है। मोबाइल से जुड़ने वाले इस चश्मे का लेंस आप अपनी नजरों के अनुसार तय कर सकते हैं।

हालांकि, कंपनी ने अभी इसका दाम तय नहीं किया है लेकिन 25–30 हजार रुपए के भीतर लाने की योजना बनाई जा रही है। वहीं, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने भी कई नवाचार प्रस्तुत किए हैं। इनमें ‘वीवान: द वाइब्रेंट ब्रेन’ एक एआई तकनीक है जो विशेष रूप से उन दिव्यांगों के लिए बनाई गई है जो चल-फिर नहीं सकते, ऑटिज्म, ध्यान अभाव अतिसक्रियता विकार, सेरेब्रल पाल्सी सहित विभिन्न बीमारियों से पीड़ित हैं। उनके लिए काफी उपयोगी है।

इस एआई मशीन को बीमार व्यक्ति के सिर पर लगाया जाता है और मॉनिटर व मोबाइल के जरिए नजर रखी जाती है। पीड़ित को यदि भूख या प्यास लगती है या फिर अन्य प्रकार की कोई परेशानी होती है तो मशीन परिजनों को इसकी चेतावनी भेजती है।

हाल संख्या-पांच में टाटा के मंडप में सबसे ज्यादा भीड़ उन युवाओं की थी, जो एआई शीशे के माध्यम से जानना चाहते थे कि उनके रंग, कदकाठी व बालों के आधार पर किस प्रकार व रंग के कपड़े उन पर जंचेंगे। टाटा यहां अपनी गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाली तकनीक को भी प्रदर्शित कर रहा है।