geeta press trust board chief says hope press sales will rise after UP gets yogi adityanath as its CM - योगी आदित्‍य नाथ के सीएम बनने से गोरखपुर के गीता प्रेस में जगी उम्‍मीद, ट्रस्‍टी बोले- अब सिलेबस में शामिल होगी हमारी संस्‍कृति - Jansatta
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योगी आदित्‍य नाथ के सीएम बनने से गोरखपुर के गीता प्रेस में जगी उम्‍मीद, ट्रस्‍टी बोले- अब सिलेबस में शामिल होगी हमारी संस्‍कृति

योगी आदित्यनाथ के सीएम बनने पर 95 साल पुरानी गीता प्रेस को उनसे काफी उम्मीदे हैं।

योगी आदित्यनाथ सबसे पहले 1998 में गोरखपुर से चुनाव भाजपा प्रत्याशी के तौर पर लड़े और तब उन्होंने बहुत ही कम अंतर से जीत दर्ज की। (Source: social media)

योगी आदित्य नाथ के सीएम बनने पर 95 साल पुरानी गीता प्रेस को उनसे काफी उम्मीदे हैं। में हिंदू धर्म-संस्कृति की किताबें पब्लिश करने वाली गीता प्रेस देशभर में किसी लेजेंड से कम नहीं मानी जाती लेकिन बीते काफी समय से सेल्स में गिरावट के चलते प्रेस की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। वहीं योगी आदित्य नाथ के सीएम बनने पर ऐसी उम्मीद की जा रही है कि प्रेस के अच्छे दिन जल्द ही शुरू हो जाएंगे। इसकी एक खास वजह यह भी मानी जाती है कि योगी आदित्य नाथ और गीता प्रेस दोनों एक ही जगह(गोरखपुर) से आते हैं।

हाल ही में गीता प्रेस ट्रस्ट बोर्ड के चीफ राधेश्याम खेमका ने योगी आदित्या नाथ के राज्य के सीएम बनने पर नई उम्मीद जताई है। बिजनेस स्टैंडर्ट की खबर के मुताबिक उन्होंने कहा- “आज की युवा पीढ़ी अपनी धार्मिक (हिंदू) संस्कृति से काफी अंजान है। इसकी वजह यह भी है कि उन्हें ऐसा माहौल ही नहीं मिला जिसमें जिससे वह धर्म के बारे में सीख सखें।” खेमका ने आगे कहा- “योगी आदित्य नाथ अपनी धार्मिक संस्कृति से जुड़े हुए हैं, वह गोरखपुर से भी हैं और पारम्परिक जीनवशैली अपनाते हैं। ऐसे में उम्मीद है है कि हिंदू सांस्कृति में लोगों का इंट्रस्ट बढ़ेगा, जिससे लोगों का पढ़ने भी इंट्रस्ट बढ़ेगा और फिर प्रेस की सेल्स में भी इजाफा देखने को मिलेगा।”

बता दें कि 95 साल पुरानी गीता प्रेस के नाम लगभग 580 मिलियन किताबों की सेल्स का रिकॉर्ड है। इसमें प्रेस की श्रीमद भगवत गीता और रामचरितमानस प्रमुख पुस्तकें हैं। 2015 में प्रेस के कर्मचारी सैलरी और नौकरियों से निकाले जाने जैसे मुद्दों को लेकर हड़ताल पर चले गए थे। प्रेस ने 12 कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया था और कुछ कॉन्ट्रैक्चुअल कर्मचारियों को भी अनुशासनहीनता और अधिकारियों से मारपीट के आरोप में बर्खास्त कर दिया था। हालांकि खेमका ने इस बात की भी जानकारी दी कि कार्मचारियों और अधिकारियों के बीच अब किसी तरह का कोई विवाद नहीं है। उनके मुताबिक प्रेस में लगभग 450 कर्मचारी कार्यरत हैं जिनमें से 200 परमानेंट हैं।

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