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डिफॉल्टर घोषित हुए योगी आदित्यनाथ सरकार के मंत्री, नहीं चुका रहे थे किस्त

योगी सरकार की सूबे में लगातार साफ-सुथरी और भ्रष्टाचार मुक्त राजनीति की इमेज बनाने की कोशिशों को उनके ही एक मंत्री के काम से झटका लग सकता है।

Author January 9, 2018 11:52 AM
पी के स्टांप और नागरिक उड्डयन मंत्री नंद गोपाल नंदी। (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की सूबे में लगातार साफ-सुथरी और भ्रष्टाचार मुक्त राजनीति की इमेज बनाने की कोशिशों को उनके ही एक मंत्री के काम से झटका लग सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने यूपी के स्टांप और नागरिक उड्डयन मंत्री नंद गोपाल नंदी को एक योजना में डिफॉल्टरों की सूची में रखा है। डिफॉल्टरों की सूची में नंदी समेत 100 विधायकों को रखा गया है। इन विधायकों को मधुबन बापूधाम योजना के अंतर्गत प्लॉट आवंटित किए गए थे। इन पर आरोप है कि किस्त न चुकाने के कारण इन्हें डिफॉल्टर घोषित किया गया। जीडीए ने शनिवार (6 जनवरी) को डिफॉल्टरों की सूची बनाकर विधानसभा की अंकुश समिति को भेजी। अंकुश समिति ने 10 दिन के अंदर जीडीए को रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा था। मामले में डिफॉल्टरों की सूची बनाकर भेजने की पुष्टि इसे देख रहे सुप्रिटेंडेंट इंजीनियर एसएस वर्मा ने की है।

2010 में मधुबन बापूधाम योजना में 280 विधायकों को प्लॉट आवंटित किए गए थे। इनमें से ज्यादातर विधायकों रजिस्ट्रेशन फीस तक जमा नहीं की। 22 विधायकों के नाम रजिस्ट्रेशन फीस जमा न कराने में शामिल हैं। 90 विधायकों की रजिस्ट्री होनी बाकी है, ये अपनी किस्त जमा कर रहे हैं। 62 विधायक किस्तें देकर रजिस्ट्री करा चुके हैं। 6 विधायकों ने प्लॉट सरेंडर ही कर दिए। 252 विधायकों को 300 वर्ग मीटर की जमीन आवंटित की गई थी। इनमें से डिफॉल्टर घोषित किए गए 100 विधायकों ने रजिस्ट्रेशन फीस तो दी लेकिन किस्तें नहीं चुकाईं।

रिपोर्ट के मुताबिक विधायकों के पास जीडीए के करीब साढ़े 51 करोड़ रुपये फंसे हैं, जिनमें एक तिहाई ब्याज और बाकी किस्त की रकम है। विधायकों ने ब्याज की रकम माफ करने के लिए अंकुश समिति से गुहार भी लगाई थी। एक पार्षद राजेंद्र त्यागी ने आवंटन में विधायकों को प्राथमिकता दिए जाने को लेकर सवाल उठाया था और मामले को अदालत में ले गए थे। मामला हाईकोर्ट में चल रहा है। कोर्ट ने विधायकों को प्राथमिकता दिए जाने के आधार बारे में शासन से पूछा है।

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