उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर जिले में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र ने विकास के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। पिछले पांच वर्षों के सभी पुराने रिकॉर्ड पीछे छोड़ते हुए जिले में निवेश, इकाइयों के पंजीकरण और रोजगार के आंकड़ों में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में जिले में 47,095 नई एमएसएमई इकाइयों का पंजीकरण हुआ है। इसी अवधि में कुल निवेश लगभग 57 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गया, जो अब तक का सर्वाधिक है। इस वर्ष 4,69,066 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार भी मिला। इस अभूतपूर्व वृद्धि के पीछे ग्रेटर नोएडा में आयोजित ‘उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय व्यापार शो’ को प्रमुख उत्प्रेरक माना जा रहा है। इस आयोजन ने स्थानीय उद्यमियों को वैश्विक मंच प्रदान किया, जिससे निर्यात और निवेश की संभावनाएं कई गुना बढ़ीं।
वर्ष 2022-23 से औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आई
आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2019-20 में जिले में केवल 10,817 एमएसएमई इकाइयां पंजीकृत थीं और कुल निवेश 2,860 करोड़ रुपए था। वर्ष 2020-21 और 2021-22 में वैश्विक महामारी के कारण कुछ गिरावट देखी गई, जब क्रमशः 9,960 और 9,995 इकाइयों का पंजीकरण हुआ। वर्ष 2022-23 से औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आई और पंजीकृत इकाइयों की संख्या बढ़कर 22,430 हो गई, जिससे 2,679 करोड़ रुपए का निवेश हुआ।
इसके बाद वर्ष 2023-24 में 29,640 इकाइयां पंजीकृत हुईं और निवेश का आंकड़ा बढ़कर 29,533 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। वित्त वर्ष 2024-25 में यह वृद्धि और अधिक तेज हो गई। इस भारी निवेश का सीधा असर रोजगार पर पड़ा है। इस वर्ष 4,69,066 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला, जबकि वर्ष 2019-20 में यह संख्या मात्र 15,389 थी।
यह वृद्धि दर्शाती है कि गौतमबुद्धनगर अब न केवल बड़े उद्योगों बल्कि छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए भी देश का सबसे पसंदीदा हब बनकर उभरा है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को एक नई मजबूती मिली है।
जिले में यूपी सरकार के प्रोत्साहन और बेहतर बुनियादी ढांचे के कारण तेजी से निवेश बढ़ रहा है। यही कारण है कि पिछले साल बड़ी संख्या में एमएसएमई इकाइयां पंजीकृत हुईं, आने वाले समय में यह आंकड़ा और भी बढ़ेगा।
अनिल कुमार, संयुक्त आयुक्त उद्योग, उत्तर प्रदेश सरकार
