दिल्ली से सटे नोएडा और ग्रेटर नोएडा में साल 2025 निवेशकों और घर खरीदने वालों के लिए बेहद उत्साहजनक रहा। गौतमबुद्ध नगर जनपद में संपत्तियों की रजिस्ट्री के मामले में इस वर्ष अब तक का सबसे बड़ा रिकार्ड दर्ज किया गया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पूरे साल में कुल 1.47 लाख रजिस्ट्री हुईं, जो जिले के इतिहास में सर्वाधिक हैं। यह आंकड़ा पिछले वर्ष 2024 की तुलना में अधिक है, जब कुल 1.44 लाख रजिस्ट्रियां दर्ज की गई थीं।
बढ़ोतरी से यूपी सरकार के राजस्व में भी इजाफा
इस बढ़ोतरी का सकारात्मक असर उत्तर प्रदेश सरकार के राजस्व पर भी पड़ा। गौतमबुद्ध नगर के निबंधन विभाग के खजाने में स्टांप शुल्क के माध्यम से पिछले एक साल में भारी धनराशि जमा हुई। जहां 2024 में विभाग को 3338 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ था, वहीं 2025 में यह बढ़कर 3646 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। अधिकारियों का मानना है कि यह वृद्धि दर्शाती है कि लोग अब निवेश के बजाय रहने के उद्देश्य से संपत्तियों की खरीद में अधिक रुचि दिखा रहे हैं। प्रशासन की सक्रियता और बिल्डर-बायर्स विवाद सुलझाने के निरंतर प्रयासों के कारण ही यह कीर्तिमान स्थापित हो सका।
गौतमबुद्ध नगर के सहायक महानिरीक्षक निबंधन-प्रथम अरुण कुमार शर्मा ने बताया कि लोगों की सहूलियत के लिए रविवार को भी कार्यालय खोलने की योजना बनाई जा रही है, जिससे अधिक लोग रजिस्ट्री करा सकें।
रजिस्ट्री में उछाल के कारण
रजिस्ट्री की बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ा कारण लंबे समय से अटकी परियोजनाओं का समाधान है। उत्तर प्रदेश सरकार और स्थानीय विकास प्राधिकरणों द्वारा लागू की गई नई नीतियों, विशेषकर अमिताभ कांत समिति की सिफारिशों के क्रियान्वयन के बाद, कई बिल्डर परियोजनाओं की रजिस्ट्री का रास्ता साफ हुआ। कई सालों से अपने मालिकाना हक का इंतजार कर रहे खरीदार अब संपत्ति का अधिकार हासिल कर पा रहे हैं। इसके अलावा, जेवर हवाई अड्डे के निर्माण में तेजी और बेहतर कनेक्टिविटी ने भी लोगों के बीच घर खरीदने के प्रति विश्वास जगाया है।
डिफाल्टर परियोजनाओं का भविष्य
सबसे अधिक चिंताजनक स्थिति उन परियोजनाओं की है जिनमें बिल्डर खुद को दिवालिया घोषित कर चुके हैं या डिफाल्टर हो गए हैं। ऐसी संपत्तियों के लिए अब ‘दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता’ के तहत विशेष प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इन मामलों में नेशनल कंपनी ला ट्रिब्यूनल द्वारा नियुक्त ‘रेजोल्यूशन प्रोफेशनल’ प्रोजेक्ट की कमान संभालते हैं और उसे पूरा कराने का प्रयास करते हैं। फंसे हुए खरीदारों के पास अब सीमित लेकिन महत्त्वपूर्ण विकल्प बचे हैं। वे समूह बनाकर अपनी एसोसिएशन के माध्यम से प्रोजेक्ट को पूरा करने की जिम्मेदारी लेने की मांग कर सकते हैं। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश रेरा और अदालत के हस्तक्षेप से ऐसी परियोजनाओं को किसी नए सक्षम डेवलपर को सौंपने की प्रक्रिया भी तेज की जा रही है।
इसका उद्देश्य यह है कि वर्षों से लटकी परियोजनाओं को पूरा कर निवासियों को कानूनी मालिकाना हक दिलाया जा सके और रियल एस्टेट बाजार में विश्वास कायम रहे।
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देश में घर खरीदने का सपना आज भी करोड़ों लोगों के लिए सबसे बड़ा सपना है. लेकिन रियल एस्टेट सेक्टर की मौजूदा तस्वीर थोड़ी उलझी हुई नजर आती है. साल 2025 में जहां एक तरफ महंगे और लग्ज़री घरों की बिक्री तेजी से बढ़ी, वहीं आम आदमी के लिए बने अफोर्डेबल घरों की बिक्री पर दबाव नजर आया. ऐसे में रियल एस्टेट इंडस्ट्री को उम्मीद है कि केंद्र सरकार के बजट 2026 में अफोर्डेबल और रेंटल हाउसिंग पर खास जोर दिया जाएगा। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
