उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर में रियल एस्टेट क्षेत्र में बड़े उछाल के दावों के बीच निबंधन विभाग के आंकड़ों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के जो आंकड़े सामने आए हैं, वे न केवल चौंकाने वाले हैं बल्कि विभाग की कार्यशैली और बाजार की वास्तविक स्थिति पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
इस वित्तीय वर्ष में निबंधन विभाग अपने निर्धारित लक्ष्य से काफी पीछे रह गया है। शासन की ओर से विभाग को 5180 करोड़ रुपए का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन इसके मुकाबले विभाग केवल 4498 करोड़ रुपए ही जुटा सका। विभाग अपने लक्ष्य का केवल 86.83 फीसद ही प्राप्त कर पाया है, जो पिछले अनुमानों के उलट एक बड़ी गिरावट को दर्शाता है।
हैरानी की बात यह है कि राजस्व में यह कमी तब आई है जब इस साल कुल 1.64 लाख रजिस्ट्रियां निष्पादित की गईं। यदि इसकी तुलना बीते वित्तीय वर्ष 2024-25 से करें, तो उस समय 4880 करोड़ रुपए के लक्ष्य के सापेक्ष 4457 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ था और रजिस्ट्रियों की संख्या 1.72 लाख थी।
हालांकि बीते वर्ष की तुलना में इस बार राजस्व में मामूली बढ़त दिख रही है, लेकिन लक्ष्य के करीब न पहुंच पाना विभाग की बड़ी विफलता मानी जा रही है। विशेष रूप से तब, जब जेवर एयरपोर्ट और फिल्म सिटी जैसी बड़ी परियोजनाओं के कारण जिले के रियल एस्टेट बाजार में भारी तेजी की उम्मीद जताई जा रही थी।
जानकारों का मानना है कि जिले में सर्किल रेट और बाजार दर के बीच का बढ़ता अंतर एक बड़ी बाधा बना हुआ है। इसके अलावा, कई बड़ी हाउसिंग सोसायटियों में बिल्डर-बायर्स विवाद और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट मिलने में देरी के कारण फ्लैटों की रजिस्ट्री का काम अधर में लटका है।
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नोएडा में भूमि अधिग्रहण के दौरान किसानों को दिए गए अत्यधिक मुआवजे के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान एसआइटी ने बड़ा खुलासा किया। जांच में सामने आया है कि कुछ किसानों को जरूरत से ज्यादा मुआवजा दिलाने के बदले अधिकारियों को 10 फीसद कमीशन देने की बात तय हुई थी। 100 करोड़ रुपए के अतिरिक्त मुआवजा घोटाले मामले में सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई हुई। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने जांच में देरी पर सख्ती दिखाते हुए एसआइटी को छह सप्ताह के भीतर जांच पूरी कर रपट अदालत में दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। पूरी खबर पढ़ें…
