Delhi News: डॉ. बी.आर. अम्बेडकर विश्वविद्यालय के कश्मीरी गेट परिसर के एंट्री गेट पर शनिवार को छात्र अपने हाथों में खाने के पैकेट लेकर इकट्ठा हुए। यह खाना उन छात्रों और पीएचडी स्कॉलर्स के लिए था जो छह दिनों से कैंपस के अंदर अनिश्चितकालीन विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे। उनकी मांगों में पीने का पानी, क्लासरूम, फैकल्टी की कमी, छात्रों का प्रतिनिधित्व और कैंपस के इलाकों तक पहुंच जैसी बातें शामिल थीं।
लेकिन गेट के बाहर मौजूद लोगों का आरोप था कि सिक्योरिटी गार्ड्स ने उन्हें कैंपस में घुसने से रोका और वे प्रदर्शनकारियों तक खाना नहीं पहुंचा पाए। जेंडर स्टडीज की एमए छात्रा ब्लेसी ने बताया कि कई छात्रों की कक्षाएं और परीक्षाएं होने के बावजूद उन्हें कैंपस में प्रवेश करने से रोक दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि शनिवार को कैंपस छात्रों के लिए बंद था और गार्डों ने बाहर खड़े छात्रों को प्रदर्शनकारियों को खाना देने से रोका और खाना लेने की कोशिश करने वालों के साथ मारपीट की।
विश्वविद्यालय ने बयान में क्या कहा?
हालांकि, विश्वविद्यालय के पीआरओ ने शनिवार को एक बयान में कहा कि तय समय के बाद गेट पर लाए जा रहे सामान की सुरक्षा कारणों से सिक्योरिटी स्टाफ ने जांच की। ऑफिस ने यह भी कहा कि उनकी मेडिकल टीम प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर नजर रख रही है और उन्हें मदद भी दे रही है।
इसमें आगे कहा गया कि लाइब्रेरी, कंप्यूटर लैब और कुछ ब्लॉक मेंटेनेंस के लिए बंद किए गए थे और छात्रों को पहले ही इसकी जानकारी दे दी गई थी। पीआरओ ऑफिस ने कहा, “छात्रों ने सिक्योरिटी गार्ड्स के साथ बदसलूकी की है और यह मामला दिल्ली पुलिस के संज्ञान में है। यूनिवर्सिटी के सिक्योरिटी गार्ड्स ने अपनी तरफ से कोई कार्रवाई शुरू नहीं की है। उनका काम स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल के तहत कैंपस की सुरक्षा बनाए रखना है।”
इसके अलावा एयूडी ने कहा कि हालांकि उसने शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के लिए एक जगह तय की है, लेकिन छात्र लाइब्रेरी और क्लासरूम के पास वाली जगह पर बैठे हैं, जिससे दूसरे छात्रों पर भी बुरा असर पड़ रहा है। विश्वविद्यालय ने कहा कि उसके प्रॉक्टर ऑफिस ने प्रदर्शनकारियों से तय की गई जगह पर जाने की अपील की थी।
प्रदर्शनकारियों से बातचीज जारी- विश्वविद्यालय
विश्वविद्यालय ने कहा कि वह प्रदर्शनकारियों के साथ लगातार बातचीत कर रही है और उनकी मान्य और जायज मांगों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। यह टकराव उस विरोध-प्रदर्शन का ताजा घटनाक्रम है जो पांच सूत्रीय मांगों के साथ शुरू हुआ था, लेकिन अब यह इस बात पर छात्रों की चिंताओं तक फैल गया है कि विश्वविद्यालय का कामकाज कैसे चलाया जा रहा है।
विरोध प्रदर्शन के केंद्र में छात्रों के लिए विश्वविद्यालय का मेन गेट फिर से खोलने, प्रशासन और छात्र क्षेत्रों को अलग करने वाले लोहे के फाटकों को हटाने, पीएचडी शुल्क माफी को बहाल करने, 31 जुलाई के उस सर्कुलर को वापस लेने की मांग है जिसमें छात्रों को सार्वजनिक सभाओं के आयोजन के बारे में विश्वविद्यालय को चार दिन पहले सूचित करने की जरूरत होती है और पीएचडी स्कॉलर्स के लिए अनिवार्य उपस्थिति की शर्त को हटाना शामिल है।
इंडियन एक्सप्रेस ने 7 अगस्त को रिपोर्ट किया था कि एयूडी ने फेलोशिप पाने वाले पीएचडी स्कॉलर्स से उपस्थिति और ठिकाने का रिकॉर्ड मांगा था और कहा था कि कैंपस में रिसर्च के काम से बिना इजाजत अनुपस्थित रहने पर उनकी फेलोशिप पर असर पड़ सकता है।
पीएचडी स्कॉलर आमीन अमितोज ने कहा, “पीएचडी छात्रों के लिए फीस में छूट बंद कर दी गई थी और विश्वविद्यालय ने इसके लिए रिसर्च स्कॉलर्स को मिलने वाले स्टाइपेंड का हवाला दिया था।” उन्होंने आगे कहा कि मेन गेट बंद होने की वजह से छात्रों को पिछले गेट का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने कहा, “यूनिवर्सिटी का मुख्य गेट छात्रों के लिए बंद कर दिया गया है। उस गेट से सिर्फ वाइस चांसलर, प्रॉक्टर और रजिस्ट्रार ही अंदर आ सकते हैं।”
कैंपस को सचमुच दो हिस्सों में बांट दिया- विवेक
करमपुरा कैंपस काउंसिल के कोषाध्यक्ष और एमए परफॉर्मेंस स्टडीज के छात्र विवेक ने एक अन्य गेट की ओर इशारा किया। इसे लगभग डेढ़ साल पहले कैंपस के अंदर स्थापित किया गया था। उन्होंने कहा, “इसने कैंपस को सचमुच दो हिस्सों में बांट दिया। एक तरफ छात्र समुदाय है और दूसरी तरफ प्रशासन।”
उन्होंने आगे कहा कि एयूडी के करमपुरा परिसर में छात्र बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “आरओ सिस्टम और वाटर कूलर खराब होने के कारण लगभग छह महीने तक पीने का पानी असुरक्षित रहा। छात्रों को कैंटीन से पानी खरीदना पड़ा।”
विवेक ने शिक्षकों की कमी की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा, “मेरे तीसरे सेमेस्टर की शुरुआत हुए लगभग ढाई महीने हो चुके हैं और हमारे एक विषय के लिए अभी भी कोई शिक्षक नहीं है।” करमपुरा कैंपस के एक मास्टर छात्र ने बताया कि छात्रों को खराब सुविधाओं, अपर्याप्त कक्षाओं और शिक्षकों की कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। छात्र ने कहा, “हमारे पास पीने का पानी नहीं है। हमारे पास साफ टॉयलेट नहीं हैं। कुछ छात्रों को पढ़ाने के लिए शिक्षक भी नहीं हैं। टाइम टेबल हमेशा गड़बड़ाती रहती है क्योंकि पर्याप्त कक्षाएं नहीं हैं।” उन्होंने आगे बताया कि पीएचडी छात्रों के पास काम करने और चर्चा करने के लिए अलग से जगह नहीं है।
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पंजाब में दो विश्वविद्यालयों में छात्रों ने उग्र प्रदर्शन किया है। पहले राजपुरा में स्थित चितकारा यूनिवर्सिटी में छात्रों ने प्रदर्शन किया तो इसके बाद जालंधर की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) में जबरदस्त हंगामा हुआ है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…
