बिहार सरकार ने बाढ़ के लिहाज से संवेदनशील जिलों में नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फ़ोर्स (NDRF) और स्टेट डिज़ास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (SDRF) की 33 टीमें तैनात की हैं। कई नदियों में पानी का लेवल बढ़ रहा है और इससे राज्य के कई हिस्से प्रभावित हो रहे हैं। आपदा प्रबंधन विभाग ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

एक अधिकारी ने कहा, “NDRF की 6 और SDRF की 27 टीमें कमज़ोर जिलों में तैनात की गई हैं और राहत और बचाव काम के लिए चौबीसों घंटे तैयार हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि प्रभावित इलाकों में लोगों को लाने ले जाने और सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने के लिए 693 सरकारी नावें भी चलाई जा रही हैं।

खतरे के निशान से ऊपर गंगा

अधिकारियों के मुताबिक, गंगा नदी पटना सदर के दीघा और गांधी घाट, मोकामा के हाथीदह, साथ ही भागलपुर, कहलगांव, बक्सर और मुंगेर में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। गंडक नदी गोपालगंज के सिधवलिया के डुमरिया घाट और वैशाली के हाजीपुर में खतरे के निशान से ऊपर है। कोसी नदी खगड़िया के गोगरी के बलतारा और कटिहार के कुरसेला में खतरे के निशान को पार कर गई है।

बूढ़ी गंडक खगड़िया में निशान से ऊपर है, जबकि पुनपुन पटना के श्रीपालपुर में निशान से ऊपर है और घाघरा भी सीवान के दरौली में निशान से ऊपर है।अधिकारी ने दावा किया, “बढ़ते लेवल के बावजूद, लगातार मॉनिटरिंग और प्रशासनिक तैयारियों से बाढ़ के असर को कम करने में मदद मिली है। उन्होंने आगे कहा कि ज़िला प्रशासन राहत ऑपरेशन चला रहे हैं, जिसमें कम्युनिटी किचन चलाना और रिलीफ कैंप लगाना शामिल है।

सम्राट चौधरी ने किया बाढ़ की स्थिति का हवाई सर्वे

शुक्रवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बाढ़ की स्थिति का हवाई सर्वे किया। अधिकारियों के साथ एक हाई-लेवल मीटिंग में उन्होंने बाढ़ की स्थिति, तटबंधों और राहत के उपायों का और रिव्यू किया, और अधिकारियों को प्रभावित लोगों तक समय पर राहत और ज़रूरी सर्विस पहुँचाने का निर्देश दिया।

सभी प्रभावित ज़िलों के जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में रहने, प्रभावित लोगों की लिस्ट बनाने और तुरंत राहत पहुंचाने के लिए कहा गया। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया कि वे बाढ़ राहत कैंप और कम्युनिटी किचन के ज़रिए बिना रुकावट खाना और दूसरी सप्लाई सुनिश्चित करें, कमज़ोर और निचले इलाकों की लगातार निगरानी करें, और जल संसाधन विभाग को बक्सर से भागलपुर तक तटबंधों की लगातार निगरानी करने के लिए कहें।

भागलपुर, भोजपुर, पटना, वैशाली और दूसरे जिलों में कम्युनिटी किचन बनाए गए हैं। अधिकारियों ने कहा कि आने वाले दिनों में हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान है। इस बीच इस हफ़्ते की शुरुआत में राज्य के डेयरी, फिशरीज और एनिमल रिसोर्स डिपार्टमेंट ने लोगों को नेपाल से बाढ़ के पानी के साथ बिहार पहुंचाने वाली अनजान या अजीब दिखने वाली मछलियों को न खाने की सलाह दी। एडवाइज़री में चेतावनी दी गई थी कि बाढ़ से विस्थापित मछलियाँ सीवेज, मरे हुए जानवरों और दूसरे कचरे के संपर्क में आने के बाद बैक्टीरिया, वायरस और फंगस से खराब हो सकती हैं और लोगों से हालात ठीक होने तक बाढ़ के पानी से पकड़ी गई मछलियों से बचने की अपील की गई।

यह भी पढ़ें- ‘माता-पिता की सैलरी और कृषि आय को मत गिने’, आरक्षण विवाद के बीच बिहार सरकार ने क्रीमी-लेयर नियमों को किया सख्त

बिहार में क्रीमी-लेयर नियमों को सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने सख्त कर दिया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने कहा कि बिहार के अधिकारी यह तय करते समय कि आवेदक के माता-पिता क्रीमी लेयर में आते हैं या नहीं, उनकी सैलरी या खेती से होने वाली इनकम को नहीं गिन सकते। पढ़ें पूरी खबर