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गढ़चिरौली हमले में जान गंवाने वाले शाहू मदावी के परिजन बोले- खाना भी अधूरा छोड़कर भागा था, फिर लौटा ही नहीं

शाहू मदावी के चाचा होलिकर ने बताया कि छुट्टी के दिन वे खाना खा रहे थे। तभी अचानक फोन आया और खाना बीच में ही छोड़कर चले गए। उन्हें तुरंत ड्यूटी ज्वॉइन करने का आदेश मिला था।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (फोटो सोर्सः इंडियन एक्सप्रेस)

महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में बुधवार (1 मई) को हुए नक्सली हमले मारे गए पुलिसकर्मियों की दर्दनाक कहानियां सामने आ रही हैं। इस हमले में 16 पुलिसकर्मियों और एक ड्राइवर की मौत हो गई थी। इन्हीं में पुलिसकर्मी शाहू मदावी और ड्राइवर तोमेश्वर सिंघत भी शामिल थे। मदावी के रिश्तेदार के मुताबिक वो महाराष्ट्र दिवस की छुट्टी पर घर आए थे, लेकिन अचानक नौकरी पर बुला लिया गया और इसी हमले में उनकी मौत हो गई।

बारात लेकर जाने वाले थे सिंघतः तोमेश्वर को 11बजे पुलिस की क्विक रिस्पॉन्स टीम को घटना पर पहुंचाना था। वहीं सिंघत के भाई हितेंद्र ने बताया कि उसको 12 बजे एक बारात को भी ले जाना था। एक घंटे का समय हाथ में होने की वजह से सिंघत ने भी हां कर दिया, लेकिन सिंघत को यह सफर भारी पड़ गया। उन्होंने इसी में अपनी जान गंवा दी। उल्लेखनीय है कि सिंघत उर्फ दादू की शादी पांच साल पहले हुई थी। उनके पिता एक किसान हैं और भाई हितेंद्र मजदूरी करता है। वहीं दादु के परिजनों का कहना है कि उन्हें भी शहीद का दर्जा दिया जाए।

खाना खाते-खाते चले गए मदावीः शाहू मदावी के चाचा होलिकर ने बताया कि छुट्टी के दिन वे खाना खा रहे थे। तभी अचानक फोन आया और खाना बीच में ही छोड़कर चले गए। उन्हें तुरंत ड्यूटी ज्वॉइन करने का आदेश मिला था। उन्होंने बताया कि वे परिवार के अकेले कमाने वाले थे और उनके परिवार में मां बाप के साथ उनकी पत्नी और तीन साल का एक बेटा भी है।

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सीएम ने किया मुआवजे का ऐलानः घटना पर शोक प्रकट करते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी घटनास्थल पर गए थे। उन्होंने मृतक पुलिसकर्मियों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपए का मुआवजा देने का ऐलान किया था।

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