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कार एक्सीडेंट में बच्ची सहित 4 लोग जिंदा जले, स्वर्ण मंदिर दर्शन कर लौट रहा था परिवार

सात महीने की बच्ची कैसे उनके परिवार की किलकारी बनी हुई थी, यह सोचकर वह चुप हो जाते हैं। पल भर में उनका पूरा परिवार उनसे छिन गया। संचित निजी कंपनी में कार्य करते थे जबकि पढ़ी लिखी भावना घरेलू महिला थीं।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

भूप सिंह के लिए मंगलवार की सुबह मनहूस साबित हुई। स्वर्ण मंदिर पर मत्था टेकने के बाद अचानक कुल्लू मनाली घूमने गए उनके बेटे-बहू और पोती की असमय मौत ने उन्हें अंदर तक हिलाकर रख दिया। होली पर जिस खुशी से उन्होंने अपने बच्चे को अमृतसर भेजा था, वह खुशी मंगलवार तड़के इस तरह गम में बदल जाएगी ऐसा उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था। डेढ़ साल पहले जिस बेटे की शादी इतनी धूमधाम से की गई थी, उसकी अर्थी सात महीने की बच्ची के साथ निकलेगी, यह सुनकर उनके होश उड़ गए। हरिनगर के एम-ब्लाक में रहने वाले भूप सिंह के बेटे 28 साल के बेटे संचित चोपड़ा, 23 साल की भावना चोपड़ा और सात महीने की पौत्री तुषारिका चोपड़ा और संचित की सास नरेश कुमारी भोला की मंगलवार तड़के हरियाणा के करनाल, तरावड़ी हाईवे पर शामगढ़ गांव के पास एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई।

भूप सिंह की आंखों से आंसू थम नहीं रहे और वे बार-बार अपनी पौत्री तुषारिका को याद करते हैं। सात महीने की बच्ची कैसे उनके परिवार की किलकारी बनी हुई थी, यह सोचकर वह चुप हो जाते हैं। पल भर में उनका पूरा परिवार उनसे छिन गया। संचित निजी कंपनी में कार्य करते थे जबकि पढ़ी लिखी भावना घरेलू महिला थीं। गुरुवार एक मार्च की सुबह बेटा संचित, बहू भावना, पोती तुषारिका और भावना की मां नरेश अमृतसर के लिए निकले थे। नरेश अपने बेटे के साथ सुभाष नगर इलाके में रहती थीं। होली पर सभी स्वर्ण मंदिर में मत्था टेकने गए थे। वहां उनकी मुलाकात भावना के कुछ रिश्तेदारों से हुई। वहां से वे लोग घूमने के लिए कुल्लू-मनाली चले गए। सोमवार को रिश्तेदारों को घर छोड़कर भावना और संचित दिल्ली के लिए निकले थे। भूप सिंह ने बताया कि सोमवार शाम साढ़े छह बजे संचित की मां ने बेटे से बात की तो मंगलवार को तड़के बेटे ने घर पहुंच जाने की बात बताई थी।

मंगलवार तड़के भूप सिंह की आंख खुली तो उन्होंने बेटे को फोन किया। संचित से बातें नहीं हुई तो उन्होंने भावना को फोन लगाया। फोन एक पुलिसवाले ने उठाया और उन्हें दुर्घटना के बारे में जानकारी दी जिसे सुनकर उनके हाथ से फोन गिर गया। पुलिस ने जब उन्हें तुरंत करनाल आने कहा तो सिंह को अनहोनी का अंदेशा हो गया था लेकिन जल्द ही पूरी घटना की जानकारी परिवार को मिल गई और फिर मंगलवार दिन भर घर में मां और बहन का रो-रो कर बुरा हाल हो गया। जुलाई में तुषारिका का जन्मदिन था। उसके जन्म दिन को परिवार धूम-धाम से मनाना चाह रहे थे। मंगलवार तड़के चार बजे करनाल हाईवे पर शामगढ़ गांव के पास ट्रक और कार में हुई भिड़ंत में चारों जिंदा जल गए। पुलिस और फायर बिग्रेड की गाड़ियां मौके पर पहुंची तो स्थिति हृदयविदारक थी। ट्रक और कार दोनों आगे की चपेट में दिख रहा था और कार में सवार चारों जिंदा जल रहे थे। हादसे के चलते कुछ देर के लिए हाईवे पर जाम भी लगा। कार संचित चला रहा था और शुरुआती जांच में यही अंदेशा है कि उसकी आंखे लग गई और यह हादसा हो गया। पेट्रोल की टंकी में आग लगने से उसने ट्रक को भी अपनी चपेट में ले लिया। पुलिस ने लोगों की मदद से कार में बुरी तरह से जल चुके चारों को कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज ले गई जहां उन्हें मृत घोषित कर दोपहर तक पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को शव सौंप दिया गया।

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