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अरेस्ट BSF जवान से मिला एक और ISI के जासूस का नाम, गिरफ्तार हुआ स्कूली शिक्षक

सीमा पार के आकाओं के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार बीएसएफ के जवान अब्दुल राशिद से मिली जानकारी के बाद दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने शनिवार को मामले में चौथी गिरफ्तारी की।

Author नई दिल्ली | December 5, 2015 11:40 PM

सीमा पार के आकाओं के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार बीएसएफ के जवान अब्दुल राशिद से मिली जानकारी के बाद दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने शनिवार को मामले में चौथी गिरफ्तारी की। संयुक्त पुलिस आयुक्त रवींद्र यादव ने बताया कि आरोपी साबर राजौरी के एक सरकारी स्कूल में शिक्षक है। उसे शनिवार सुबह गिरफ्तार किया गया और सरकारी गोपनीयता कानून के प्रावधानों के तहत उस पर मामला दर्ज किया गया।

आइएसआइ के लिए जासूसी करने के कथित मामले में यह चौथी गिरफ्तारी है। पुलिस ने मामले में और गिरफ्तारी के संकेत भी दिए हैं। साबर को काफी नाटकीय ढंग से गिरफ्तार किया गया क्योंकि उसने गांव में राजौरी पुलिस के साथ पहुंची दिल्ली पुलिस की टीम को चकमा देने का प्रयास किया। कुछ स्थानीय लोगों ने भी पुलिस की कार्रवाई का प्रतिरोध किया।

आरोप है कि कफईतुल्ला खान आइएसआइ के लिए जासूसी गिरोह चला रहा था। खान पहला व्यक्ति था जिसे 26 नवंबर को नई दिल्ली से गिरफ्तार किया गया। उस वक्त वह धार्मिक समारोह में हिस्सा लेने और कथित रूप से ज्यादा जासूसों की भर्ती के लिए भोपाल रवाना हो रहा था। इसके बाद बीएसएफ के कर्मी अब्दुल राशिद और सेना के पूर्व हवलदार मुनव्वर अहमद मीर को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि समझा जाता है कि साबर के माध्यम से खान ने राशिद, मीर और दूसरे सहयोगियों से मुलाकात की। इसमें सेना का एक सेवारत कर्मी भी शामिल है, जिसके लिए पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में पुलिस की एक टीम भेजी गई है।

मीर और खान दोनों को अपराध शाखा के अंतरराज्यीय प्रकोष्ठ की 14 सदस्यीय टीम ने गिरफ्तार किया जो बुधवार को राजौरी पहुंची थी। अधिकारी ने कहा कि उन्हें वहां की एक अदालत में पेश किया गया। वे ट्रांजिट रिमांड पर हैं। साबर को काफी नाटकीय ढंग से गिरफ्तार किया गया। पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि ऐसा संदेह है कि साबर को किसी ने पहले ही छापेमारी के बारे में सूचना दे दी थी क्योंकि पुलिस की टीम जब पहुंची तो उसका घर बाहर से बंद पाया। अचानक साबर छत पर दिखा और पीछे की तरफ कूद गया। अधिकारी ने कहा कि उसका पैर जख्मी हो गया और गिर गया। तुरंत कुछ स्थानीय लोग इकट्ठा हुए और पुलिस की टीम को कथित तौर पर रोकने लगे।

अधिकारी ने कहा कि दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले को सुलझाने के लिए जम्मू-कश्मीर के अपने समकक्ष अधिकारियों को फोन किया। अधिकारी ने कहा कि पुलिस को साबर के पास से कोई कागजी दस्तावेज नहीं मिला। बहरहाल, उन्होंने दावा किया कि उसके खिलाफ काफी सबूत मिले हैं जिनमें खान का खुलासा और टेलीफोन पर हुई बातचीत भी शामिल है जिसे सीडी से हासिल किया गया।

कथित गिरोह को मिलने वाले धन की जांच कर रहे पुलिस के एक अन्य अधिकारी ने कहा कि पुलिस को पता चला है कि खान ने साबर के बैंक खाते में दो बार पांच हजार रुपए जमा कराए। बहरहाल जांच के सिलसिले में इन ब्योरे की पुष्टि की जानी है जिसमें पता चला है कि खान को पाकिस्तान से धन मिलता था। यह धन सऊदी अरब और यूएई के रास्ते उसे स्थानांतरित किया जाता था। अधिकारी ने कहा कि समझा जाता है कि खान को स्थाई रूप से भुगतान मिलता था।

समझा जाता है कि साबर भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध की तरह की स्थिति पैदा होने पर सीमा पर सैनिकों की आवाजाही के बारे में अहम सूचना इकट्ठा करता था। वह सिलीगुड़ी के पास सूचना इकट्ठा करने का काम करता था जिसकी जांच अपराध शाखा की आठ सदस्यीय टीम कर रही है। उसने कथित खुफिया संचालकों को सीमा पार सूचनाएं भेजीं। जांच से परिचित एक अधिकारी के मुताबिक, बहरहाल मीर से पूछताछ के दौरान पता चला है कि करगिल युद्ध के दौरान वह सेवारत था और वहां पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ता के रूप में काम करता था।

अधिकारी ने कहा कि उसकी गिरफ्तारी पर भी क्षेत्र में हल्का विरोध हुआ और एक नेता के नेतृत्व में एक धड़े ने दावा किया कि मीर को मामले में फंसाया जा रहा है। मीर को लेकर पुलिस पर्याप्त साक्ष्य होने का दावा कर रही है जिसमें टेलीफोन पर हुई बातचीत और अन्य ब्योरे हैं, जिससे उसे गिरफ्तार किया जा सके। मीर और साबर से पूछताछ के बाद यहां पाकिस्तान उच्चायोग में आइएसआइ के कथित सूत्र के बारे में पता चल सकता है।

उच्चायोग में कथित आइएसआइ सूत्र खान को पाकिस्तान की यात्रा करने के लिए वीजा हासिल करने में सहयोग करने वाला था जहां जासूसों से मुलाकात करनी थी और ज्यादा संसाधन और प्रशिक्षण हासिल करना था। राजौरी गई पुलिस की टीम वर्तमान में सेना के एक कर्मी को खोज रही है, जिसका नाम खान से पूछताछ के दौरान सामने आया था और समझा जाता है कि जासूसी गिरोह की वह एक बड़ी कड़ी है।

 

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