उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भवन चंद्र खंडूरी का सोमवार को निधन हो गया है। खंडूरी लंबे वक्त से बीमार चल रहे थे और देहरादून के एक प्राइवेट अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। खंडूरी की बेटी और उत्तराखंड विधानसभा की अध्यक्ष रितु खंडूरी भूषण ने पिता के निधन के बारे में जानकारी दी है।
खंडूरी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहने के अलावा अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में सड़क परिवहन और राजमार्ग मामलों के मंत्री भी रह चुके थे। देश के चारों हिस्सों को सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए बनाई गई स्वर्णिम चतुर्भुज योजना का श्रेय उन्हें दिया जाता है। वह बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं में शुमार थे।
सीएम धामी ने जताया शोक
खंडूरी के निधन पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत तमाम बड़े नेताओं ने दुख व्यक्त किया है। पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि खंडूरी ने भारतीय सेना में रहते हुए राष्ट्र सेवा, अनुशासन और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। सैन्य जीवन से लेकर सार्वजनिक जीवन तक उनका व्यक्तित्व राष्ट्रहित और जनसेवा के प्रति समर्पित रहा।
धामी ने कहा है कि खंडूरी का निधन उत्तराखंड ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति है।
‘जनरल साहब’ के नाम से मशहूर थे खंडूरी
खंडूरी 91 वर्ष के थे। खंडूरी के परिवार में पत्नी अरूणा, बेटा मनीष और बेटी रितु खंडूरी भूषण हैं। रितु खंडूरी भूषण ने बताया कि उनके पिता ने करीब 11 बजे अस्पताल में अंतिम सांस ली। राजनीति में आने से पहले भारतीय सेना से मेजर जनरल के पद से सेवानिवृत्त हुए खंडूरी ‘जनरल साहब’ के नाम से मशहूर थे और उनकी छवि अनुशासन प्रिय प्रशासक की थी।
खंडूरी दो बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे। पहली बार वर्ष 2007 में भाजपा के सत्ता में आने के बाद खंडूरी मुख्यमंत्री बने। हालांकि, 2009 में लोकसभा चुनावों में प्रदेश की पांचों सीटों पर पार्टी को मिली पराजय का जिम्मा लेते हुए उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया था। बाद में, 2011 में उन्हें भाजपा ने फिर से राज्य की कमान सौंपी थी।
प्रदेश की राजनीति का एक कद्दावर और ईमानदार चेहरा रहे खंडूरी के निधन से प्रदेश में शोक का माहौल है।
